कवर्धा: 18 गांवों ने 40 अवैध चर्चों पर कार्रवाई मांगी

3 नवंबर 2026 (मंगलवार) को छत्तीसगढ़ के कबीरधाम (कवर्धा) जिले के पंडरिया और बोड़ला विकासखंडों के वनांचल कुई-कुकदूर क्षेत्र के 18 गांवों के सैकड़ों ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने कलेक्टर तूलिका प्रजापति को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम ज्ञापन सौंपकर 40 से अधिक कथित अवैध चर्चों और प्रार्थना सभाओं पर रोक और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
तस्वीर को समझिए: 18 गांव, 40 चर्च, एक ज्ञापन — और बैगा आदिवासी नेता इतवारी बैगा की मांग कि कलेक्टर खुद गांव आकर देखें। दूसरी ओर गांव का एक ईसाई, जो नाम नहीं बताना चाहता, कहता है कि उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एक ही जिले में दो कहानियां आमने-सामने खड़ी हैं, और प्रशासन ने अभी किसी की पुष्टि नहीं की है।
ज्ञापन में क्या आरोप हैं
ग्रामीणों का आरोप है कि वनांचल में 40 से अधिक स्थानों पर चर्च और प्रार्थना सभाएं चल रही हैं, जिनमें से कई सरकारी वन भूमि पर कब्जा करके बनाए गए हैं। उनका यह भी आरोप है कि गरीब, अशिक्षित आदिवासी परिवारों को प्रलोभन देकर उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है।
ज्ञापन में यह भी आरोप है कि इस काम में सरकारी शिक्षक, मितानिन (ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ता), आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और कोटवार जैसे सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। ग्रामीण अपने साथ शामिल लोगों के नामों की सूची भी लेकर पहुंचे थे।
यह साफ करना जरूरी है: ये आरोप हैं, स्थापित तथ्य नहीं। प्रशासन की ओर से इन आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। इस लेख में हर आरोप उसी रूप में लिखा गया है — ग्रामीणों का दावा, ज्ञापन की बात — क्योंकि सच्चाई की जांच अभी बाकी है।
बैगा नेता की मांग: कलेक्टर खुद गांव आएं
बैगा समाज के प्रदेश अध्यक्ष इतवारी राम मछिया (इतवारी बैगा) ने कहा कि कलेक्टर को गांवों का दौरा करके शिकायतों की जांच करनी चाहिए। उनकी मांग सीधी है: कागजों पर नहीं, जमीन पर आकर देखिए कि क्या हो रहा है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो सर्वसमाज आंदोलन करेगा।
विधायक का दावा: 700 से अधिक घर वापसी
विधायक भावना बोहरा ने दावा किया है कि पिछले तीन वर्षों में जागरूकता अभियानों के जरिए 700 से अधिक लोगों की घर वापसी कराई गई है। यह आंकड़ा विधायक का दावा है, जिसे नै दुनिया ने छापा है — यह कोई स्वतंत्र तथ्य नहीं है, लेकिन यह बताता है कि कवर्धा में धर्मांतरण को लेकर बहस नई नहीं है; यह तीन साल से चल रही है, और अब 18 गांव एक साथ कलेक्ट्रेट पहुंच गए हैं।
दूसरी तरफ की आवाज़
एक गांव के एक ईसाई ने (नाम न छापने की शर्त पर) यूसीए न्यूज़ को बताया कि उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यह आवाज़ इस कहानी का दूसरा सिरा है — वह व्यक्ति जो आरोपों के बीच रहता है, और जो अपना नाम बताने से डरता है।
कवर्धा की यह घटना अकेली नहीं है। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण और चर्चों को लेकर तनाव पहले भी सुर्खियों में रहा है, और राज्य का धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 7 अप्रैल 2026 से लागू है। उसी कानून की पृष्ठभूमि में यह ज्ञापन आया है — और उसी कानून के तहत अब इसकी जांच की मांग हो रही है।
आगे क्या होगा
अब सवाल यह है कि कलेक्टर तूलिका प्रजापति इस ज्ञापन पर क्या करती हैं। क्या वे गांवों का दौरा करेंगी, जैसा इतवारी बैगा ने मांग की है? क्या आरोपों की जांच होगी, और जांच में क्या निकलेगा? ग्रामीणों की चेतावनी के बाद समय भी मायने रखता है।
भारत में ईसाई समुदाय की कहानियां अक्सर मुश्किलों से जुड़ी होती हैं, और इस साइट पर वे दर्ज भी हुई हैं। आज: छत्तीसगढ़ के कोरबा में पास्टर पीतांबर सिंह हिरासत में — बजरंग दल ने लगाया धर्मांतरण का आरोप में कोरबा में एक पास्टर की हिरासत की खबर थी, और छत्तीसगढ़ के चर्चों में 'केवल ईसाई' नोटिस: धर्मांतरण कानून के बाद बढ़ा डर में धर्मांतरण कानून के बाद चर्चों में बढ़े डर की कहानी थी। छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 को चुनौती: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया में उसी कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
भारत भर में भी ऐसी ही खबरें आती रही हैं। कोलकाता प्रार्थना रैली: सैकड़ों ईसाई सड़कों पर, 48 हमले में 5 नवंबर को कोलकाता में हुई प्रार्थना रैली की खबर थी, और आज: कोलकाता में 5 नवंबर को तीन जुलूसों के साथ ईसाइयों की प्रार्थना रैली, 11 राज्यों के चर्च नेता शामिल होंगे में उसी रैली की घोषणा की गई थी। मणिपुर के नोनी में नागा गुटों की गोलीबारी, 3 ईसाई मारे गए में मणिपुर की हिंसा दर्ज थी।
और भी कहानियां हैं जो भारत के चर्च की तस्वीर पूरी करती हैं। छत्तीसगढ़ के भंडारडीगी में ईसाई परिवारों पर हमला: विकास सलाम बोले — जमीन छोड़ देंगे, मसीह नहीं छोड़ेंगे में एक परिवार की दृढ़ता की कहानी थी, पश्चिम बंगाल में ईसाइयों के बाइबल सम्मेलन पर हमला: 1,900 आदिवासी विश्वासी घर भेजे गए में बाइबिल सम्मेलन पर हमले की खबर थी, और सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में चर्च शिखर की तोड़फोड़ पर रोक लगाई में चर्च को अदालत से राहत मिली थी। आज: शिलांग में FCRA पर जेपीसी की बैठक, चर्चों को विदेशी चंदे का सिर्फ 6 प्रतिशत मिलने का दावा में चर्चों के पैसे पर बहस दर्ज है, और भारत में मसीही सताव 2026: बढ़ते दबाव के बीच कलीसिया कैसे टिकी हुई है में बढ़ते दबाव के बीच कलीसिया की कहानी है।
अब सबकी नजर कवर्धा कलेक्ट्रेट पर है। क्या कलेक्टर गांवों का दौरा करेंगी? क्या जांच में ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाएंगे, या गलत? और गांव का वह ईसाई, जो नाम नहीं बताना चाहता — क्या उसकी आवाज़ भी सुनी जाएगी? कवर्धा का यह ज्ञापन सिर्फ एक कागज नहीं है; यह एक सवाल है, जिसका जवाब अब प्रशासन को देना है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
3 नवंबर 2026 को 18 गांवों के ग्रामीणों ने कलेक्टर तूलिका प्रजापति को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम ज्ञापन सौंपकर 40 से अधिक कथित अवैध चर्चों और प्रार्थना सभाओं पर रोक और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
ग्रामीणों का आरोप है कि 40 से अधिक स्थानों पर चर्च चल रहे हैं, कई सरकारी वन भूमि पर बने हैं, और गरीब आदिवासी परिवारों को प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। ये आरोप हैं — प्रशासन ने पुष्टि नहीं की है।
बैगा समाज के प्रदेश अध्यक्ष इतवारी राम मछिया ने कहा कि कलेक्टर को गांवों का दौरा करके शिकायतों की जांच करनी चाहिए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो सर्वसमाज आंदोलन करेगा।
विधायक भावना बोहरा ने दावा किया है कि पिछले तीन वर्षों में जागरूकता अभियानों के जरिए 700 से अधिक लोगों की घर वापसी कराई गई है। यह उनका दावा है, कोई स्वतंत्र तथ्य नहीं।
छत्तीसगढ़ का धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 7 अप्रैल 2026 से लागू है। कवर्धा का ज्ञापन उसी कानून की पृष्ठभूमि में आया है।
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