पश्चिम बंगाल में ईसाइयों के बाइबल सम्मेलन पर हमला: 1,900 आदिवासी विश्वासी घर भेजे गए

शुक्रवार की शाम थी। नदिया जिले के जलालखली गाँव में डिवाइन लव रिट्रीट सेंटर के परिसर में करीब 1,900 संताली आदिवासी ईसाई प्रार्थना में झुके हुए थे। वे चार दिवसीय वार्षिक बाइबल सम्मेलन के दूसरे दिन में थे — कोई डर नहीं, कोई हथियार नहीं, सिर्फ भजन और बाइबल। तभी गेट के बाहर भीड़ की आवाज़ उठी। मिनटों में ईंटें और पत्थर उड़ने लगे। जो शाम प्रार्थना की थी, वह दहशत में बदल गई।
9 अक्टूबर 2026 को हुए इस हमले में करीब 200 लोगों की भीड़ बांस की छड़ें और ईंटें लेकर सेंट लुई पैरिश चर्च परिसर में घुसने का प्रयास करती रही। भीड़ ने पत्थर फेंके, ईसाई-विरोधी नारे लगाए, चर्च की संपत्ति में तोड़फोड़ की और गेट की रक्षा कर रहे लोगों को पीटा। टेलीग्राफ इंडिया के अनुसार कम से कम 6 विश्वासी घायल हुए।
जलालखली की वो शाम: ईंटों और पत्थरों से हमला
हमलावरों ने सम्मेलन के बैनर फाड़ डाले और यीशु की मूर्ति का कांच का केस तोड़ दिया। गेट पर खड़े रक्षकों को पीटा गया। दूर-दराज़ इलाक़ों से आई आदिवासी महिलाओं, बुज़ुर्गों और बच्चों वाले परिवार सहमे हुए चर्च परिसर के अंदर जमा हो गए।
यह वार्षिक संताली मेगा बाइबल कन्वेंशन रिट्रीट हर साल होता था — शांतिपूर्वक, कानून के दायरे में। आयोजकों के पास पहले से सभी सरकारी अनुमतियाँ थीं और पुलिस सुरक्षा का अनुरोध भी भेजा गया था। लेकिन अनुमतियाँ और अनुरोध उस शाम किसी काम नहीं आए।
"अगर आरोप झूठे हैं, तो डर फैलाना बंद करो।" — हेरोड मलिक, बंगिया क्रिश्चिया परिषेवा (टेलीग्राफ इंडिया)
चार दिन का बाइबल सम्मेलन दो दिन में सिमट गया
8 से 11 अक्टूबर तक चलने वाला यह सम्मेलन हमले के बाद समय से पहले समाप्त करना पड़ा। 1,900 विश्वसी — जिनमें कई बुज़ुर्ग और बच्चे भी थे — अधूरी प्रार्थना के साथ घर भेज दिए गए। चार दिनों की भजन-प्रार्थना, बाइबल अध्ययन और संगति का कार्यक्रम दो ही दिनों में खत्म हो गया।
कृष्णानगर के बिशप निर्मल विंसेंट गॉम्स, जिनके धर्मक्षेत्र में यह सम्मेलन हो रहा था, खुद इस घटना के गवाह हैं। उनका कहना है कि कानून का पालन करने वाले समुदाय पर इस तरह का हमला अस्वीकार्य है — और दोषियों पर कार्रवाई होनी ही चाहिए।
CBCI की निंदा: 'लाउडस्पीकर पर झूठा नैरेटिव चलाया गया'
कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) ने 12 अक्टूबर को औपचारिक बयान जारी कर हमले की कड़ी निंदा की। बयान में कहा गया कि लाउडस्पीकरों पर 'फोर्स्ड कन्वर्ज़न' (जबरन धर्मांतरण) का झूठा नैरेटिव चलाया गया — और इसी झूठ का इस्तेमाल जानबूझकर भीड़ को ईसाई समुदाय के ख़िलाफ़ भड़काने के लिए किया गया। CBCI ने पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप की माँग की।
"परेशान करने वाले वीडियो बताते हैं कि लाउडस्पीकरों पर 'फोर्स्ड कन्वर्ज़न' का झूठा नैरेटिव चलाया गया। यह दुर्भावनापूर्ण कृत्य जानबूझकर भीड़ को ईसाई समुदाय के ख़िलाफ़ भड़काने के लिए इस्तेमाल किया गया।" — कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI)
पश्चिम बंगाल में ईसाइयों पर हमले: 13 मई से 20 सितंबर के बीच 60 घटनाएँ
यह कोई अकेली घटना नहीं है। इंडिया हेट लैब और यूसीए न्यूज़ के आंकड़ों के अनुसार, 13 मई से 20 सितंबर 2026 के बीच पश्चिम बंगाल में ईसाइयों के ख़िलाफ़ कम से कम 60 घटनाएँ दर्ज की गईं — यानी करीब हर दो दिन मे एक घटना। भारत भर में बढ़ते दबाव की पूरी तस्वीर भारत में मसीही सताव 2026 की हमारी रिपोर्ट में पढ़ी जा सकती है।
यही पैटर्न दुनिया भर में दिखता है। नाइजीरिया में जहाँ 2026 में हज़ारों मसीही मारे गए और चर्चों पर रात के हमले होते रहे — और जहाँ पाकिस्तान में ईशनिंदा कानूनों के तहत ईसाई मौत की सज़ा का सामना कर रहे हैं। सताई गई कलीसिया हर देश में एक ही सवाल पूछ रही है: प्रार्थना करना कब से अपराध हो गया?
आगे क्या: क्या कलीसिया डटी रहेगी?
इतिहास की गवाही एक ही है: जहाँ सताव बढ़ा, वहाँ कलीसिया घटी नहीं — गहरी हुई। भारत में बढ़ती कलीसिया की अनकही कहानी इसी सच की गवाह है। वे 1,900 संताली विश्वासी जिन्होंने पत्थरों के बीच भी प्रार्थना नहीं छोड़ी, वे डर के आगे झुकने वालों में से नहीं हैं।
लेकिन सवाल अब भी हवा में है — क्या अगले साल का संताली मेगा बाइबल सम्मेलन फिर यहीं, इसी परिसर में होगा? क्या वे 1,900 आवाज़ें फिर एक साथ भजन गाएँगी, बिना डरे, बिना झुके? इसका जवाब इस पर टिका है कि सरकारें और समाज इस हमले के बाद क्या करते हैं। CBCI की अपील गृह मंत्री तक पहुँच चुकी है। अब नज़रें उस कार्रवाई पर हैं जिसका वादा माँगा गया है — क्योंकि 1,900 प्रार्थनाएँ अधूरी छोड़ दी गईं, और वे अधूरी प्रार्थनाएँ जवाब माँगती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह हमला 9 अक्टूबर 2026 की शाम को हुआ, जब जलालखली, नदिया जिले के डिवाइन लव रिट्रीट सेंटर (सेंट लुई पैरिश चर्च परिसर) में वार्षिक संताली मेगा बाइबल कन्वेंशन रिट्रीट का दूसरा दिन चल रहा था।
टेलीग्राफ इंडिया के अनुसार कम से कम 6 विश्वासी घायल हुए। चार दिवसीय सम्मेलन (8–11 अक्टूबर) में 1,900 से अधिक संताली आदिवासी ईसाई शामिल हो रहे थे, जिसे हमले के बाद समय से पहले समाप्त करना पड़ा।
कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया ने 12 अक्टूबर को बयान जारी कर हमले की निंदा की और कहा कि लाउडस्पीकरों पर 'फोर्स्ड कन्वर्ज़न' का झूठा नैरेटिव चलाकर भीड़ को भड़काया गया। CBCI ने पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से कार्रवाई की माँग की।
इंडिया हेट लैब और यूसीए न्यूज़ के आंकड़ों के अनुसार, 13 मई से 20 सितंबर 2026 के बीच पश्चिम बंगाल में ईसाइयों के ख़िलाफ़ कम से कम 60 घटनाएँ दर्ज की गईं।
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