मणिपुर के नोनी में नागा गुटों की गोलीबारी, 3 ईसाई मारे गए

4 नवंबर 2026 की सुबह करीब 1:55 से 4:00 बजे के बीच मणिपुर के नोनी जिले के खौपुम इलाके के ताओदाईजांग गांव में प्रतिद्वंद्वी नागा गुटों के बीच भारी गोलीबारी हुई, जिसमें तीन ईसाई युवक मारे गए और दो घायल हो गए। मारे गए तीनों युवक नागा आदिवासी समुदाय से थे और उनकी उम्र 20 से 25 साल के बीच थी। Times of India, PTI और ThePrint की खबरों के अनुसार, यह गोलीबारी ज़ेलियांगरोंग यूनाइटेड फ्रंट–जेंचुई (ZUF-J) और ZUF–कामसन (ZUF-K) तथा NSCN-IM की संयुक्त टुकड़ी के बीच हुई।
लेकिन इस खबर का सबसे दर्दनाक पहलू गोलियों की गिनती नहीं है, बल्कि एक चर्च नेता की वह बात है जो उसने UCA News से कही — कि ईसाई अब भीतर से अपनी सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं, क्योंकि यह हिंसा अपने ही लोगों के बीच से उठ रही है।
नोनी गोलीबारी में मारे गए तीन युवक कौन थे
मारे गए तीनों युवकों की पहचान हो गई है, खबरों के अनुसार। मेइजियानथुई थाइमी (एम थाइमी), 25 साल, लुंग्लेई गांव के थे। गेनिगम कामसन (जी कामसन), 20 साल, लुआंगचुम गांव से थे। तीसरे युवक आइहुंग खुंबा, 22 साल, पुंगमोन चिंगचेन गांव के थे।
तीनों की उम्र देखकर ही यह साफ हो जाता है कि यह हिंसा किस पीढ़ी को निगल रही है। बीस से पच्चीस साल की उम्र में कोई युवक अपने गांव और चर्च के लिए कुछ बनने का सपना देखता है। खबरों के अनुसार, ZUF-J ने पुष्टि की है कि मारे गए तीन में से दो उसके अपने कैडर थे।
गोलीबारी कैसे हुई और कौन से गुट आमने-सामने थे
Times of India और PTI की रिपोर्ट के अनुसार, गोलीबारी तड़के करीब 1:55 बजे शुरू हुई और सुबह करीब 4:00 बजे तक चली। एक तरफ ZUF-J के हथियारबंद लोग थे और दूसरी तरफ ZUF-K तथा NSCN-IM की संयुक्त टुकड़ी थी, जबकि UCA News ने इसे ZUF-J और NSCN-IM के बीच की लड़ाई बताया है।
शुरुआती खबरों में मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए। UCA News, Times of India, PTI और ThePrint के अनुसार तीन लोग मारे गए और दो घायल हुए, जबकि IANS और लोकमत की शुरुआती रिपोर्ट में चार लोगों के मारे जाने और एक के घायल होने की बात कही गई थी। गांव के लोगों ने बाद में शवों को बरामद किया, खबरों के अनुसार।
गांव वालों ने शव बरामद किए, इम्फाल–उखरुल सड़क पर भी फायरिंग
गोलीबारी थमने के कुछ घंटों बाद स्थानीय गांव वालों ने तीनों शवों को बरामद किया, खबरों के अनुसार। इसके कुछ ही घंटों बाद संदिग्ध हथियारबंद लोगों ने इम्फाल–उखरुल सड़क पर यात्री और मालवाहक वाहनों पर गोलीबारी की, हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
सड़क पर हुई यह दूसरी फायरिंग यह दिखाती है कि गोलीबारी का डर सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं रहा, क्योंकि इम्फाल–उखरुल सड़क पहाड़ी जिलों को जोड़ने वाली एक अहम सड़क है।
500 से ज्यादा जवानों का तलाशी अभियान शुरू
गोलीबारी के बाद 5 नवंबर की सुबह 3:30 बजे से मणिपुर पुलिस, CRPF, कोबरा और असम राइफल्स के 500 से ज्यादा जवानों ने नुंगबा और केकरू नागा इलाकों में बड़ा तलाशि और घेराबंदी अभियान शुरू कर दिया, The New Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार।
खबरों के अनुसार, अभियान अभी जारी है और इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, ताकि और हिंसा न भड़के।
मणिपुर में ईसाइयों के सामने भीतर से सबसे बड़ी चुनौती
इस घटना का सबसे गहरा असर मणिपुर के ईसाई समुदाय पर पड़ा है, क्योंकि मारे गए तीनों युवक नागा आदिवासी ईसाई थे। UCA News से बात करते हुए एक चर्च नेता ने कहा कि ईसाई अब भीतर से अपनी सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "We do not know where we will end up with this kind of brutal killings among us [tribal Christians]." यानी वह नहीं जानते कि अपने ही लोगों के बीच इस तरह की बर्बर हत्याओं के साथ समुदाय कहां पहुंचेगा।
उसी चर्च नेता ने शांति की अपील करते हुए कहा, "We want peace and appeal to leaders from both the communities to end violence and begin dialogue."
मणिपुर में ईसाइयों की स्थिति पहले भी इस साइट पर दर्ज हुई है, जैसे आज: मणिपुर में पांच कुकी लोगों की हत्या से शांति वार्ता खतरे में, चर्च नेता ने जांच की मांग की में शांति वार्ता पर चर्च नेताओं की आवाज उठी थी, और हैदराबाद में ईसाइयों के लिए कब्र की जगह खत्म: 300 किलोमीटर दूर खेत में दफनाए गए जॉन सुकुमार में समुदाय की मुश्किलों का एक और पहलू सामने आया था। आज: कोलकाता में 5 नवंबर को तीन जुलूसों के साथ ईसाइयों की प्रार्थना रैली, 11 राज्यों के चर्च नेता शामिल होंगे में भी चर्च नेताओं ने शांति और सुरक्षा की मांग उठाई थी।
कुकी–नागा हिंसा और मणिपुर का लंबा संकट
UCA News की रिपोर्ट के अनुसार, कुकी और नागा समुदायों के बीच हिंसा तब शुरू हुई जब 18 अप्रैल को एक घात लगाकर किए गए हमले में दो नागा लोग मारे गए थे। उस दिन से अब तक दोनों समुदायों के 72 लोग मारे जा चुके हैं, एक चर्च नेता के अनुसार।
मणीपुर में मई 2023 से चल रही हिंसा में अब तक 260 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और करीब 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं। राज्य की 3.2 मिलियन आबादी में आदिवासी ईसाई करीब 41 प्रतिशत हैं।
इसी बीच कुकी-ज़ो संगठन CoTU ने कुकी बहुल पहाड़ी इलाकों में जारी पूर्ण बंद को 6 नवंबर तक बढ़ा दिया है, और दो अगवा कुकी युवकों पर कार्रवाई की मांग कर रहा है, जिनके क्षत-विक्षत शव 31 अक्टूबर को बरामद हुए थे। 31 अक्टूबर को केकरू नागा गांव में हुई कुकी युवकों की हत्या एक अलग घटना है, उसे 4 नवंबर की गोलीबारी से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
अब सवाल यह है कि क्या 5 नवंबर का तलाशी अभियान और चर्च नेताओं की शांति की अपील इस हिंसा को रोक पाएगी, या अगले कुछ दिनों में कोई और गांव इसी खबर का अगला अध्याय बन जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
4 नवंबर 2026 की सुबह नोनी जिले के ताओदाईजांग गांव में नागा गुटों की गोलीबारी में तीन ईसाई युवक मारे गए, दो घायल हुए।
मेइजियानथुई थाइमी (25, लुंग्लेई), गेनिगम कामसन (20, लुआंगचुम) और आइहुंग खुंबा (22, पुंगमोन चिंगचेन)।
Times of India और PTI के अनुसार, ZUF-J के सामने ZUF-K और NSCN-IM की संयुक्त टुकड़ी थी।
UCA News, Times of India, PTI और ThePrint के अनुसार तीन मारे गए और दो घायल हुए; IANS और लोकमत की शुरुआती रिपोर्ट में चार मृतक और एक घायल बताए गए थे।
एक चर्च नेता ने UCA News से कहा कि ईसाई अब भीतर से अपनी सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं, और उन्होंने दोनों समुदायों के नेताओं से हिंसा खत्म कर बातचीत की अपील की।
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