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📰 FaithStories News Desk · Article #577 · Published: 06 Nov 2026, 01:03 AM UTC

कोलकाता प्रार्थना रैली: सैकड़ों ईसाई सड़कों पर, 48 हमले

A large peaceful prayer march on a Kolkata street at dusk, seen from behind the crowd, people holding candles, no legible placards or text
5 नवंबर 2026 को कोलकाता में सैकड़ों ईसाइयों ने प्रार्थना रैली निकाली और चर्चों पर कथित हमलों का विरोध किया, Millennium Post की रिपोर्ट के अनुसार।

गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को कोलकाता में सैकड़ों ईसाई सड़कों पर उतरे और राज्य स्तरीय प्रार्थना रैली में हिस्सा लिया। बंगीय क्रिश्चिया परिषेबा (BCP) के आयोजन में हुई इस रैली में प्रदर्शनकारियों ने पश्चिम बंगाल में पिछले पांच महीनों में चर्चों और प्रार्थना सभाओं पर कथित हमलों, तोड़फोड़ और उत्पीड़न का विरोध किया। रैली का नेतृत्व ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल के अध्यक्ष आर्चबिशप जोसेफ डी'सूजा ने किया।

दोपहर के समय तीन प्रार्थना जुलूस एक साथ निकले — हावड़ा से, सियालदह से और बिड़ला तारामंडल से — और एस्प्लेनेड के रानी रश्मोनी एवेन्यू पर आकर मिल गए। वहां सभी ने मिलकर संयुक्त प्रार्थना की। यह सिर्फ एक शहर की भीड़ नहीं थी: ओडिशा, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड से पादरी और चर्च प्रतिनिधि भी रैली में शामिल हुए थे, और तीन जिलों में इसी तरह के प्रदर्शन हुए।

इस रैली की सबसे चौंकाने वाली बात वह संख्या है जो BCP के संस्थापक राज्य सचिव हेरोद मल्लिक ने बताई। उनके अनुसार, संगठन ने पांच महीनों में हिंसा और उत्पीड़न की 48 घटनाएं दर्ज की हैं। इनमें से कई घटनाएं दर्ज ही नहीं हुईं — 32 मामलों में पीड़ितों को FIR दर्ज कराने से रोका गया, और सिर्फ 16 मामलों में शिकायत दर्ज हो पाई। यानी हर तीन में से दो मामलों में पुलिस तक शिकायत पहुंची ही नहीं।

48 घटनाएं, 32 FIR नहीं: हेरोद मल्लिक ने क्या कहा

हेरोद मल्लिक ने साफ कहा कि शांतिपूर्ण प्रार्थना सभाओं को जबरन धर्मांतरण की अवैध घटनाओं के रूप में पेश किया जा रहा है। उन्होंने जबरन धर्मांतरण के आरोपों को खारिज किया और कहा कि लोग सिर्फ प्रार्थना के लिए इकट्ठा हो रहे थे। उनके अनुसार, यही गलत पेशकश समुदाय के खिलाफ हमलों की वजह बन रही है।

मल्लिक ने क्रिसमस से पहले समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता भी जताई। क्रिसमस ईसाइयों का सबसे बड़ा त्योहार है, और जब प्रार्थना सभाओं पर हमले हो रहे हों, तो त्योहार से पहले डर स्वाभाविक है। रैली का संदेश यही था: समुदाय शांति से प्रार्थना करना चाहता है, और उसे इसकी सुरक्षा चाहिए।

आंकड़ों को लेकर एक सावधानी जरूरी है, क्योंकि अलग-अलग स्रोत अलग-अलग संख्याएं बता रहे हैं। 48 घटनाओं का आंकड़ा BCP और मल्लिक का है, जो रैली के दिन बताया गया। इसके अलावा, 3 नवंबर की घोषणा में इंस्टीट्यूट फॉर हीलिंग एंड लीडरशिप की गिनती के हवाले से 65 घटनाओं का जिक्र था। और India Hate Lab का आंकड़ा — 13 मई से 20 सितंबर के बीच 13 जिलों में 60 घटनाएं — The Hindu की रिपोर्ट में दर्ज है। ये तीनों अलग-अलग स्रोतों के अलग-अलग आंकड़े हैं, इन्हें एक साथ मिलाकर नहीं देखना चाहिए।

रैली से एक दिन पहले: RSS प्रमुख से मुलाकात

रैली से एक दिन पहले, 4 नवंबर को, BCP का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल RSS के पश्चिम बंगाल प्रमुख जिश्नु बसु से मिला। यह मुलाकात अपने आप में खबर थी: एक ईसाई संगठन के प्रतिनिधि उस संगठन के राज्य प्रमुख से मिल रहे थे, जिसके बारे में समुदाय को शिकायतें थीं। बसु ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि वह उनकी चिंताएं मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के सामने उठाएंगे।

चर्च नेताओं और BCP प्रतिनिधियों की एक और बैठक नवंबर के अंत तक होने की उम्मीद है। यानी बातचीत का सिलसिला रैली के साथ खत्म नहीं हुआ है, बल्कि रैली के बाद भी जारी रहने वाला है। आर्चबिशप जोसेफ डी'सूजा ने रैली में कथित धार्मिक उत्पीड़न के खिलाफ एकता का आह्वान किया, और मुलाकात से यह संकेत मिलता है कि समुदाय बातचीत का रास्ता भी खुला रखना चाहता है।

बसंति में भी ईसाइयों ने कलेक्ट्रेट पर विरोध प्रदर्शन किया, और तीन जिलों में समान प्रदर्शन हुए। यह रैली सिर्फ कोलकाता तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरे राज्य में फैली हुई आवाज थी। पश्चिम बंगाल में ईसाइयों की स्थिति पहले भी इस साइट पर दर्ज हुई है, जैसे आज: कोलकाता में 5 नवंबर को तीन जुलूसों के साथ ईसाइयों की प्रार्थना रैली, 11 राज्यों के चर्च नेता शामिल होंगे में रैली की घोषणा की गई थी, और मणिपुर के नोनी में नागा गुटों की गोलीबारी, 3 ईसाई मारे गए में देश के दूसरे हिस्से में ईसाइयों पर हिंसा की खबर थी। आज: मणिपुर में पांच कुकी लोगों की हत्या से शांति वार्ता खतरे में, चर्च नेता ने जांच की मांग की और हैदराबाद में ईसाइयों के लिए कब्र की जगह खत्म: 300 किलोमीटर दूर खेत में दफनाए गए जॉन सुकुमार में भी समुदाय की मुश्किलों के अलग-अलग पहलू सामने आए थे।

आगे क्या: नवंबर के अंत तक अगली बैठक

अब सवाल यह है कि रैली और मुलाकात के बाद क्या बदलेगा। BCP की मांग साफ है: प्रार्थना सभाओं पर हमले रुकें, FIR दर्ज करने से रोका न जाए, और क्रिसमस से पहले समुदाय को सुरक्षा का भरोसा मिले। जिश्नु बसु का आश्वासन — कि वह चिंताएं मुख्यमंत्री के सामने उठाएंगे — अब एक वादे की तरह सामने है, और समुदाय देखेगा कि वह वादा निभाया जाता है या नहीं।

नवंबर के अंत तक होने वाली अगली बैठक इस कहानी का अगला अध्याय होगी। अगर उस बैठक में ठोस कदम उठाए गए, तो 5 नवंबर की रैली को एक मोड़ के रूप में याद किया जाएगा। अगर नहीं, तो सैकड़ों लोगों की वह प्राथर्ना, मोमबत्तियां और जुलूस सिर्फ एक दिन की खबर बनकर रह जाएंगे — और क्रिसमस से पहले समुदाय की चिंता और बढ़ जाएगी। कोलकाता की सड़कों पर उठी आवाज अब सरकार और संगठनों के दरवाजे पर खड़ी है, और जवाब का इंतजार है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता में 5 नवंबर को क्या हुआ?

सैकड़ों ईसाइयों ने बंगीय क्रिश्चिया परिषेबा की राज्य स्तरीय प्रार्थना रैली में हिस्सा लिया और पश्चिम बंगाल में चर्चों व प्रार्थना सभाओं पर कथित हमलों का विरोध किया। तीन जुलूस हावड़ा, सियालदह और बिड़ला तारामंडल से निकलकर रानी रश्मोनी एवेन्यू पर मिले।

48 घटनाओं का आंकड़ा किसका है?

यह BCP और उसके संस्थापक राज्य सचिव हेरोद मल्लिक का आंकड़ा है: पांच महीनों में हिंसा और उत्पीड़न की 48 घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें से 32 मामलों में FIR दर्ज नहीं हो पाई और सिर्फ 16 में शिकायत दर्ज हुई।

65 और 60 घटनाओं के आंकड़े क्या हैं?

65 घटनाएं इंस्टीट्यूट फॉर हीलिंग एंड लीडरशिप की गिनती हैं, जिसका जिक्र 3 नवंबर की घोषणा में था। 60 घटनाएं India Hate Lab का आंकड़ा है, 13 मई से 20 सितंबर के बीच 13 जिलों में, जो The Hindu की रिपोर्ट में दर्ज है।

RSS प्रमुख से मुलाकात में क्या हुआ?

4 नवंबर को BCP का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल RSS के पश्चिम बंगाल प्रमुख जिश्नु बसु से मिला। बसु ने आश्वासन दिया कि वह समुदाय की चिंताएं मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के सामने उठाएंगे।

रैली का नेतृत्व किसने किया?

रैली का नेतृत्व ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल के अध्यक्ष आर्चबिशप जोसेफ डी'सूजा ने किया, जिन्होंने कथित धार्मिक उत्पीड़न के खिलाफ एकता का आह्वान किया।

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