आज: मणिपुर में पांच कुकी लोगों की हत्या से शांति वार्ता खतरे में, चर्च नेता ने जांच की मांग की

पांच लोग। दो अलग-अलग घटनाएं। और एक शांति वार्ता जो अब फिर से टूटने के कगार पर है।
मणिपुर के पहाड़ी राज्य में पांच कुकी आदिवासी लोगों की हत्या ने दो प्रमुख ईसाई समुदायों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है, यूसीए न्यूज़ ने 2 नवंबर को खबर दी। तीन कुकी पुरुष 31 अक्टूबर को अज्ञात सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी में मारे गए, जबकि 28 अक्टूबर से लापता दो अन्य कुकी पुरुषों के शव अगले दिन क्षत-विक्षत हालत में बरामद हुए।
इस खबर की आवाज एक ऐसे आदमी की है, जिसका नाम हम नहीं जानते। एक कुकी चर्च अधिकारी, जिसने नाम न बताने की शर्त पर 2 नवंबर को यूसीए न्यूज़ से बात की, ने कहा कि प्रतिद्वंद्वी नागा आदिवासी लोग दो पुरुषों के अपहरण और यातना के पीछे थे, जिनके क्षत-विक्षत शव «बोरियों में पैक» पाए गए।
यह आरोप है, साबित तथ्य नहीं — और इस लेख में इसे आरोप के रूप में ही रखा गया है, क्योंकि नागा पक्ष ने पांचों हत्याओं से इनकार किया है। नाम न बताने वाला चर्च नेता आज मणिपुर के ईसाई समुदाय की सबसे सच्ची तस्वीर है: वह बोल रहा है, लेकिन डर के साथ बोल रहा है।
चर्च नेता ने कहा कि शव «अभी सुरक्षा कर्मियों के पास हैं। कुकी समुदाय शव तभी स्वीकार करेगा, जब सुरक्षा बल क्रूर हत्या के पीछे के लोगों को गिरफ्तार करेंगे», यूसीए न्यूज़ के अनुसार।
हालांकि, समुदाय ने गोलीबारी में मारे गए अन्य तीन लोगों के शव स्वीकार कर लिए, «क्योंकि जिला सरकारी अस्पताल में उन्हें रखने के लिए जगह नहीं बची थी», उन्होंने कहा।
मणिपुर हिंसा: नागा समूहों पर आरोप, नागा पक्ष का इनकार और 32 मौतों का जवाबी दावा
कुकियों ने नागा सशस्त्र समूहों पर हत्या का आरोप लगाया। लेकिन उन्होंने पांचों पुरुषों की हत्या से इनकार किया और फरवरी 2026 से अब तक कुकी-ज़ो सशस्त्र समूहों द्वारा अपने 32 पुरुषों की हत्या पर कार्रवाई की मांग की, यूसीए न्यूज़ के अनुसार। डॉन अखबार ने भी पुलिस के हवाले से पुष्टि की है कि पांच लोग दो अलग-अलग घटनाओं में मारे गए: तीन नोनी जिले में शनिवार को गोलीबारी में, और दो अन्य के शव रविवार सुबह कांगपोकपी जिले में मिले।
स्थानीय विवरणों के अनुसार, मुख्य रूप से ईसाई आदिवासी समूहों के बीच झड़पों में 60 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, यूसीए न्यूज़ ने लिखा। नागाओं ने 31 अक्टूबर को राजधानी इंफाल में प्रदर्शन किया और भारत सरकार और कुकी-ज़ो सशस्त्र समूहों के बीच युद्धविराम व्यवस्था वापस लेने की मांग की। हिंदू-बहुल मेइती लोग, जो कुकी-ज़ो के साथ भी संघर्ष में हैं, इस विरोध में शामिल हो गए, जो अब मणिपुर से परे नागा-प्रभुत्व वाले क्षेत्रों तक फैल गया है।
मणिपुर में ईसाई आदिवासी: 41 प्रतिशत आबादी, तीन साल से जारी जातीय हिंसा की पृष्ठभूमि
स्वदेशी ईसाई मणिपुर की 32 लाख आबादी का 41 प्रतिशत हैं, जबकि 51 प्रतिशत मेइती सरकार और प्रशासन पर नियंत्रण रखते हैं, यूसीए न्यूज़ के अनुसार। ये आंकड़े बताते हैं कि मणिपुर में चर्च सिर्फ प्राथना की जगह नहीं है: वह एक अल्पसंख्यक समुदाय की आवाज भी है।
«हम नहीं जानते कि नागाओं और कुकियों के बीच शांति कब लौटेगी, क्योंकि 13 मई 2026 से पूरी तरह गतिरोध है, जब तीन कुकी चर्च नेताओं की घात लगाकर हत्या कर दी गई थी।» — नाम न बताने वाले कुकी चर्च अधिकारी, यूसीए न्यूज़ के अनुसार।
कुकी समुदाय की मांग: एनआईए जांच और उपमुख्यमंत्री को हटाना
कुकी-ज़ो समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले निकाय, कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी ने मांग की है कि दो अपहृत पुरुषों की हत्या की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपी जाए, यूसीए न्यूज़ के अनुसार। इसने उपमुख्यमंत्री लूसी दिखो को तुरंत हटाने की भी मांग की, क्योंकि वे अपहृत पुरुषों के जीवन की रक्षा करने में विफल रहे। ये मांगें एक समुदाय की इस मांग का हिस्सा हैं कि इस बार जांच किसी स्थानीय दबाव से प्रभावित न हो।
भारत में ईसाई समुदाय की खबरें इस साइट पर और भी पढ़ी जा सकती हैं, जैसे गुमला में कब्र पर्व, जहां 750 कब्रों पर मोमबत्तियां जलाई गईं, गोवा में सभी संतों का पर्व, जहां सैकड़ों बच्चे संत बनकर चर्च पहुंचे, वेरापोली के आर्चबिशप का परिवारों से रोज़री की परंपरा बचाकर रखने का आह्वान, छत्तीसगढ़ के भंडारडीगी में ईसाई परिवारों पर हमले की खबर और रांची में GEL चर्च के बिशप सिमंत संदीप तिर्की के निधन और अंतिम संस्कार की खबर।
जब मणिपुर की पहाड़ियों में आज रात प्रार्थना होगी, तो उन पांच नामों के लिए होगी, जिनके शव अभी अस्पताल या सुरक्षा कर्मियों के पास हैं, और उन परिवारों के लिए होगी, जो अभी तय नहीं कर पाए हैं कि शव लें या न्याय की प्रतीक्षा करें। एक सवाल हवा में रह जाएगा: क्या इस बार जांच सच तक पहुंचेगी, या फिर ये पांच मौतें भी उन 60 से अधिक मौतों की सूची में एक और संख्या बनकर रह जाएंगी, जिन्हें कोई अदालत कभी नाम से नहीं पुकारती?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यूसीए न्यूज़ और डॉन के अनुसार, तीन कुकी पुरुष 31 अक्टूबर को नोनी जिले में गोलीबारी में मारे गए, जबकि 28 अक्टूबर से लापता दो अन्य पुरुषों के शव 1 नवंबर को कांगपोकपी जिले में बरामद हुए।
कुकी समुदाय ने नागा सशस्त्र समूहों पर आरोप लगाया है, जबकि नागा पक्ष ने पांचों हत्याओं से इनकार किया है और फरवरी से अपने 32 पुरुषों की हत्या पर कार्रवाई की मांग की है, यूसीए न्यूज़ के अनुसार। आरोपों को आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है; कोई स्वतंत्र जांच निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी ने मांग की है कि दो अपहृत पुरुषों की हत्या की जांच एनआईए को सौंपी जाए और उपमुख्यमंत्री लूसी दिखो को हटाया जाए, यूसीए न्यूज़ के अनुसार। समुदाय ने कहा है कि वह दो शव तभी स्वीकार करेगा, जब हत्यारों को गिरफ्तार किया जाएगा।
संघर्ष 3 मई 2023 को भड़का, जब मेइती लोगों को आदिवासी दर्जा देने के कदम के खिलाफ कुकी विरोध हिंसक हो गया, यूसीए न्यूज़ के अनुसार। पिछली खबरों के अनुसार, 260 से अधिक लोग मारे गए और लगभग 60,000 लोग विस्थापित हुए, जिनमें से अधिकांश ईसाई थे।
स्वदेशी ईसाई मणिपुर की 32 लाख आबादी का 41 प्रतिशत हैं, जबकि मेइती 51 प्रतिशत हैं और सरकार व प्रशासन पर नियंत्रण रखते हैं, यूसीए न्यूज़ के अनुसार। चर्च नेता ने नाम न बताने की शर्त पर बात की, और उनके आरोपों को आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है।
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