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📰 FaithStories News Desk · Article #461 · Published: 02 Nov 2026, 05:31 AM PKT

आज: गुमला में कब्र पर्व पर 750 कब्रों पर मोमबत्तियां, 39 पल्लियों में विशेष प्रार्थना

झारखंड के गुमला में कब्रिस्तान में शाम को कब्रों पर जलती मोमबत्तियां और फूल चढ़ाता परिवार, नरम सांझ की रोशनी में
गुमला में कब्र पर्व की शाम को कब्रों पर मोमबत्तियां जलाता एक परिवार। आज, 2 नवंबर को, गुमला धर्मप्रांत की 39 पल्लियों की करीब 750 कब्रों पर दिवंगत परिजनों की आत्मा की शांति के लिए विशेष प्रार्थना होगी।

सात सौ पचास कब्रें। पंद्रह दिन की तैयारी। और आज शाम, एक-एक कब्र पर एक मोमबत्ती। गुमला धर्मप्रांत में सोमवार को कब्र पर्व मनाया जाएगा, और इस अवसर पर धर्मप्रांत की सभी 39 पल्लियों में स्थित करीब 750 कब्रों पर विशेष प्राथना होगी, प्रभात खबर की खबर के अनुसार। मृत परिजनों की याद में उनके चाहने वाले कब्रों को फूल-माला से सजाएंगे और मोमबत्तियां जलाकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करेंगे।

झारखंड में रोमन कैथोलिक ईसाई समुदाय के लोग आज, 2 नवंबर को, ऑल सोल्स डे को कब्र पर्व के रूप में मना रहे हैं, प्रभात खबर की दूसरी खबर के अनुसार। इस अवसर पर लोग अपने दिवंगत परिजनों, रिश्तेदारों और प्रियजनों को याद करते हैं तथा उनकी आत्मा की शांति के लिए विशेष प्रार्थना करते हैं। झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में इस पर्व को लेकर ईसाई समुदाय के लोगों ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।

कब्र पर्व के केंद्र में एक आदमी की आवाज है, जो इस दिन का मतलब सबसे साफ शब्दों में समझाता है। सीप्रियन कुल्लू ने कब्र पूजा के महत्व पर बताया कि जीवन और मृत्यु एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, प्रभात खबर के अनुसार। ख्रीस्त विश्वास के अनुसार, मृत्यु जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नयी शुरुआत है। जो लोग इस दुनिया से चले गए हैं, वे हमारे अपने हैं, इसलिए उनके लिए प्रार्थना करना जरूरी है।

«जीवन और मृत्यु एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। ख्रीस्त विश्वास के अनुसार, मृत्यु जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नयी शुरुआत है। जो लोग इस दुनिया से चले गये हैं, वे हमारे अपने हैं। इसलिए उनके लिए प्रार्थना करना जरूरी है।» — सीप्रियन कुल्लू, प्रभात खबर के अनुसार।

संत पात्रिक महागिरजा के पल्ली पुरोहित फादर जेरोम एक्का ने बताया कि कब्र पूजा की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, प्रभात खबर के अनुसार। इस दिन ख्रीस्त विश्वासी अपने सगे-संबंधियों की कब्र पर पूजा करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। फादर एक्का इस पर्व के सबसे करीबी गवाहों में से एक हैं: वे उस महागिरजाघर के पुरोहित हैं, जहां आज की सबसे खास पूजा होगी।

गुमला के पहले दो बिशपों की कब्र पर विशेष पूजा: माइकल मिंज और पौल अलविस लकड़ा

गुमला धर्मप्रांत के प्रथम बिशप माइकल मिंज और दूसरे बिशप पौल अलविस लकड़ा की कब्र पर भी विशेष पूजा की जाएगी, प्रभात खबर ने बताया। दोनों की कब्र संत पात्रिक महागिरजाघर के अंदर बनी हुई है। यहां श्रद्धालु मोमबत्तियां जलाकर उनके लिए प्रार्थना करेंगे।

इसके अलावा धर्मप्रांत के सभी चर्चों में पुरोहितों द्वारा पूजा-पाठ कराया जाएगा, प्रभात खबर के अनुसार। यानी आज गुमला में कोई चर्च खाली नहीं रहेगा। हर पल्ली में, हर छोटे चर्च में, कोई न कोई प्रार्थना होगी, कोई न कोई मोमबत्ती जलेगी, कोई न कोई नाम लिया जाएगा।

गुमला धर्मप्रांत: 39 पल्लियां, 350 छोटे चर्च और 750 कब्रें

गुमला धर्मप्रांत में कुल 39 पल्ली हैं, प्रभात खबर के अनुसार। इनके अंतर्गत 350 छोटे-छोटे चर्च आते हैं। इन चर्चों में करीब 750 कब्र हैं, जहां हर साल दो नवंबर को कब्र पूजा की जाती है। इस दौरान मृत आत्माओं के लिए विशेष प्रार्थना होती है।

ऑल सोल्स डे क्या है और कब्र पर्व में क्या-क्या होता है

झारखंड में कई स्थानों पर कैथोलिक ईसाई समुदाय के लोग ऑल सोल्स डे को कब्र पर्व के रूप में मनाते हैं, प्रभात खबर के अनुसार। इस दिन की प्रमुख परंपराएं हैं: कब्रिस्तानों में जाकर दिवंगत परिजनों की कब्रों की सफाई करना, कब्रों पर फूल चढ़ाना और मोमबत्तियां जलाना, चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाओं और मिस्सा का आयोजन, और उनकी आत्मा की शांति के लिए सामूहिक और व्यक्तिगत प्रार्थना करना।

भारत में ईसाई समुदाय की खबरें इस साइट पर और भी पढ़ी जा सकती हैं, जैसे गोवा में सभी संतों का पर्व, जहां सैकड़ों बच्चे संत बनकर चर्च पहुंचे, वेरापोली के आर्चबिशप का परिवारों से रोज़री की परंपरा बचाकर रखने का आह्वान, छत्तीसगढ़ के भंडारडीगी में ईसाई परिवारों पर हमले की खबर, रांची में GEL चर्च के बिशप सिमंत संदीप तिर्की के निधन और अंतिम संस्कार की खबर और रांची के सेंट पॉल्स कैथेड्रल में 38 बच्चों के पवित्र दृढ़ीकरण संस्कार की खबर।

जब आज रात गुमला की 750 कब्रों पर आखिरी मोमबत्ती भी बुझ जाएगी और परिवार घर लौट जाएंगे, तो एक सवाल हवा में रह जाएगा, जिसका जवाब अगले साल तक इंतजार करेगा: जिन नामों को हमने आज इतने प्यार से पुकारा, क्या हम साल भर भी उन्हें उतनी ही शिद्दत से याद रखेंगे, या फिर अगली 2 नवंबर तक भूल जाएंगे?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुमला में कब्र पर्व कब और कैसे मनाया जाता है?

2 नवंबर को, ऑल सोल्स डे के दिन। प्रभात खबर के अनुसार, गुमला धर्मप्रांत की 39 पल्लियों की करीब 750 कब्रों पर विशेष प्रार्थना होती है, श्रद्धालु कब्रों को फूल-माला से सजाते हैं और मोमबत्तियां जलाकर दिवंगत परिजनों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। तैयारी 15 दिनों से चल रही थी।

गुमला धर्मप्रांत में कितनी पल्लियां और चर्च हैं?

कुल 39 पल्लियां हैं, जिनके अंतर्गत 350 छोटे-छोटे चर्च आते हैं, प्रभात खबर के अनुसार। इन चर्चों में करीब 750 कब्र हैं, जहां हर साल 2 नवंबर को कब्र पूजा की जाती है।

संत पात्रिक महागिरजाघर में किनकी कब्रों पर विशेष पूजा होगी?

गुमला धर्मप्रांत के प्रथम बिशप माइकल मिंज और दूसरे बिशप पौल अलविस लकड़ा की कब्रों पर, प्रभात खबर के अनुसार। दोनों की कब्र संत पात्रिक महागिरजाघर के अंदर बनी हुई है, जहां श्रद्धालु मोमबत्तियां जलाकर प्रार्थना करेंगे।

ऑल सोल्स डे और ऑल सेंट्स डे में क्या अंतर है?

ऑल सेंट्स डे 1 नवंबर को सभी ज्ञात और अज्ञात संतों के सम्मान में मनाया जाता है, जबकि ऑल सोल्स डे 2 नवंबर को दिवंगत परिजनों और मृत लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना का दिन है, प्रभात खबर के अनुसार। झारखंड में ऑल सोल्स डे को कब्र पर्व के रूप में मनाया जाता है।

गुमला के बाहर ऑल सोल्स डे की प्रार्थना सभाओं का क्या कार्यक्रम है?

सेंट एंड्रयू चर्च की सूचनाओं के अनुसार, 2 नवंबर को सुबह 7 बजे ऑरेटरी में मिस्सा और कब्रिस्तान का आशीर्वाद, चर्च में 8:15, 9:30, शाम 5:30 और 7 बजे, तथा दोपहर 12 बजे कॉलेज में मिस्सा होगा। गुमला की खबरों के लिए इस लेख के स्रोत मुख्य रूप से प्रभात खबर की दो खबरें हैं।

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