रांची के सेंट पॉल्स कैथेड्रल में 38 बच्चों ने ग्रहण किया पवित्र दृढ़ीकरण संस्कार

सुबह साढ़े सात बजे चर्च की घंटी बजी तो बहुबाजार की सड़क पर छोटे-छोटे कदमों की आवाज़ें तेज़ हो गईं। कामडारा से, लोहरदगा से, मुरहू से, हटिया से, धुर्वा से और जमशेदपुर से आए 38 बच्चे अपने परिवारों के साथ सेंट पॉल्स कैथेड्रल चर्च की ओर बढ़ रहे थे। उनके हाथों में कुछ नहीं था, लेकिन उनके चेहरों पर एक सुबह की ऐसी चमक थी, जो सिर्फ किसी बड़े दिन पर दिखती है।
रांची के बहुबाजार स्थित संत पॉल्स कैथेड्रल चर्च (सीएनआई) में शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को 38 बच्चों का पवित्र दृढ़ीकरण संस्कार संपन्न हुआ। कार्यक्रम सुबह 7:30 बजे शुरू हुआ।
इसमें विभिन्न क्षेत्रों से आए ईसाई बच्चे शामिल हुए। बिशप बीबी बास्के ने मुख्य अनुष्ठान संपन्न कराया और बच्चों के सिर पर हाथ रखकर आशीष प्रदान की।
इस अवसर पर बच्चों को बाइबल की शिक्षा दी गई और प्रभु के बताए मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया। संस्कार के बाद सभी बच्चों को पहला प्रभुभोज दिया गया।
चर्च परिसर में विशेष प्रार्थना सभा आयोजित हुई, जिसमें बाइबल का उपदेश भी दिया गया। इसके बाद सभी बच्चों को बाइबल पुस्तक भेंट स्वरूप प्रदान की गई।
«ईश्वर से प्रेम रखें और प्रभु के आशीष के साथ जीवन में आगे बढ़ें। मनुष्यों से प्रेम करें और गरीबों की सेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बनाएं।»
ये शब्द बिशप बीबी बास्के के हैं, जिन्होंने बच्चों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बच्चे समाज और देश में आदर्श बनें तथा अपने अच्छे कार्यों से दूसरों के लिए प्रेरणा बनें। उनकी आवाज़ में कोई भाषण नहीं था, सिर्फ एक पिता जैसी सीधी बात थी: प्रेम करो, सेवा करो, और अच्छे कामों से दूसरों को रास्ता दिखाओ।
रांची सेंट पॉल्स कैथेड्रल: 38 बच्चे, छह क्षेत्र, एक सुबह
38 की संख्या इस खबर की जान है। ये 38 बच्चे एक ही मोहल्ले के नहीं थे।
कामडारा, लोहरदगा, मुरहू, हटिया, धुर्वा और जमशेदपुर समेत विभिन्न क्षेत्रों से आए बच्चों ने एक ही सुबह, एक ही चर्च में, एक ही संस्कार ग्रहण किया। सुबह 7:30 बजे शुरू हुआ कार्यक्रम दिन चढ़ने तक प्रार्थना, उपदेश और आशीर्वाद में बदल गया।
संस्कार की विधि में बिशप ने बच्चों के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया। इसके बाद उन्हें पहला प्रभुभोज दिया गया।
यह क्रम चर्च की पुरानी परंपरा का हिस्सा है, जिसमें दृढीकरण के बाद बच्चा प्रभुभोज में पहली बार शामिल होता है। इस बार भी वही हुआ, और बच्चों को इसके बाद बाइबल पुस्तक भेंट की गई, ताकि वे घर लौटकर भी उसी शिक्षा से जुड़े रहें।
इस मौके पर पादरी जस्टिन भुईयां, पादरी सुनील एमानुएल भुईयां, पादरी उम्बलंग जॉन डहंगा, पादरी थोमस बाजराय, पादरी जोहन भेंगरा, पादरी विकास कुजूर और पादरी ग्लोरिया डहंगा समेत अन्य पुरोहित उपस्थित रहे। इसके अलावा पैरिश सभा के सदस्य, महिला समिति, डीसीवाईएम और संडे स्कूल समिति के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
चर्च परिसर में हुई विशेष प्रार्थना सभा में बाइबल का उपदेश दिया गया। बच्चों को बाइबल की शिक्षाओं से परिचित कराया गया और प्रभु के बताए मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया। किसी बच्चे के लिए यह सुबह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं थी; यह उसके विश्वास की एक नई शुरुआत थी, जिसे पूरा समुदाय खड़ा होकर देख रहा था।
पवित्र दृढ़ीकरण संस्कार क्या है: पवित्र आत्मा का दान और विश्वास की मजबूती
पवित्र दृढ़ीकरण संस्कार, जिसे पुष्टिकरण भी कहा जाता है, ईसाई परंपरा में विश्वास की पुष्टि का संस्कार है। पुरोहित जोलजस कुजूर के शब्दों में, इसके माध्यम से बच्चों को पवित्र आत्मा का दान प्राप्त होता है। इसका उद्देश्य बच्चों को प्रभु की शिक्षा से जोड़ना और उनके जीवन में आध्यात्मिक विश्वास को मजबूत करना है।
बच्चों को दी गई बाइबल पुस्तक इस संस्कार का सबसे ठोस निशान है। प्रार्थना सभा खत्म हो जाएगी, भीड़ घर लौट जाएगी, लेकिन किताब बच्चों के साथ रहेगी।
हर बार जब वे उसे खोलेंगे, उन्हें यह सुबह याद आएगी, और वह हाथ जो उनके सिर पर रखा गया था। विश्वास, इस मायने में, सिर्फ याद नहीं है; वह एक किताब, एक आशीर्वाद और एक समुदाय का नाम है।
झारखंड चर्च समाचार: रांची के बाद कलीसिया की अगली सुबह
रांची की कलीसिया की कहानी सिर्फ इस एक चर्च तक सीमित नहीं है। इसी शहर में ग्राम सभा ने पादरियों के प्रवेश पर रोक लगाई, जिसमें बोर्ड पर PESA का हवाला दिया गया, और झारखंड के ही खूंटी में फादर बारला पर हमले के मामले में 48 घंटे में तीन पूर्व छात्र गिरफ्तार हुए। इन खबरों के बीच, सेंट पॉल्स कैथेड्रल की यह सुबह कलीसिया के दूसरे चेहरे को दिखाती है: प्रार्थना, शिक्षा और बच्चों का भविष्य।
भारत भर में कलीसिया की ऐसी ही शांत सुबहें दर्ज होती रहती हैं, जैसे सरधना चर्च में माँ ऑफ ग्रेस का नौ दिवसीय महोत्सव, जिसका मुख्य आयोजन 8 नवंबर को होगा और पोप लियो XIV द्वारा भारत के मिशनरी बिशप ओरेस्ते मारेंगो को वेनरेबल घोषित किया जाना। हर खबर का रंग अलग है, लेकिन धागा एक ही है: विश्वास रोज़ की ज़िंदगी में कैसे जिया जाता है।
38 बच्चों के लिए अब सवाल यह है कि इस सुबह के बाद क्या होगा। क्या वे बाइबल पुस्तक को सिर्फ अलमारी में रख देंगे, या उसे खोलकर पढ़ेंगे भी? क्या वे गरीबों की सेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बनाएंगे, जैसा बिशप ने कहा, या यह बात भीड़ के शोर में खो जाएगी? इन सवालों का जवाब किसी खबर में नहीं मिलेगा; वह उनके आने वाले दिनों में मिलेगा।
क्या ये 38 बच्चे सच में आदर्श बनेंगे, जैसा बिशप ने कहा? क्या उनकी बाइबल पुस्तकें खुलेंगी, उनकी प्रार्थनाएँ जारी रहेंगी, और उनकी सेवा गरीबों तक पहुँचेगी? यह जानने के लिए किसी और खबर का इंतज़ार नहीं करना होगा; यह जानने के लिए रांची की गलियों में इन बच्चों के आने वाले दिनों को देखना होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
30 अक्टूबर 2026, शुक्रवार सुबह 7:30 बजे, रांची के बहुबाजार स्थित सेंट पॉल्स कैथेड्रल चर्च (सीएनआई) में 38 बच्चों का पवित्र दृढ़ीकरण संस्कार संपन्न हुआ।
38 बच्चे शामिल हुए, जो कामडारा, लोहरदगा, मुरहू, हटिया, धुर्वा और जमशेदपुर समेत विभिन्न क्षेत्रों से आए थे।
बिशप बीबी बास्के ने मुख्य अनुष्ठान संपन्न कराया और बच्चों के सिर पर हाथ रखकर आशीष प्रदान की।
पुरोहित जोलजस कुजूर के अनुसार, इस संस्कार के माध्यम से बच्चों को पवित्र आत्मा का दान प्राप्त होता है; इसका उद्देश्य बच्चों को प्रभु की शिक्षा से जोड़ना और उनके जीवन में आध्यात्मिक विश्वास को मजबूत करना है।
संस्कार के बाद सभी बच्चों को पहला प्रभुभोज दिया गया और बाइबल पुस्तक भेंट स्वरूप प्रदान की गई।
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