खूंटी फादर बारला हमला आज: 48 घंटे में तीन पूर्व छात्र गिरफ्तार, 85,747 रुपये बरामद

रात के साढ़े आठ बजे थे, स्कूल का आंगन सुनसान था और फादर बेनेडिक्ट बारला अकेले थे। त्योहार के कारण स्कूल बंद था, और जो साथी आमतौर पर उनके साथ रहते थे, वे अपनी मां के अंतिम संस्कार में गए हुए थे। उसी अकेली रात में नकाबपोश युवक स्कूल परिसर में घुसे — और 48 घंटे के अंदर पुलिस ने उनमें से तीन को पकड़ लिया, जिनकी उम्र सिर्फ 13, 14 और 15 साल है।
फादर बारला खूंटी के आरसी बॉयज मिडिल स्कूल के प्रिंसिपल हैं और सेंट माइकल कैथेड्रल के सहायक पादरी भी हैं। 20 अक्टूबर की रात करीब 8:30 से 9 बजे के बीच वे स्कूल परिसर में थे, तभी हमला हुआ। अगली सुबह, 21 अक्टूबर को, वे स्कूल परिसर में बेहोश और गंभीर रूप से घायल पाए गए।
पहले उन्हें खूंटी सदर अस्पताल ले जाया गया, फिर गंभीरता को देखते हुए रांची के पल्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। फादर बारला मधुमेह के मरीज हैं, इसलिए डॉक्टरों को पहले उनकी हालत स्थिर करनी पड़ी।
हमले की खबर फैलते ही खूंटी में आदिवासी ईसाई समुदाय सड़कों पर उतर आया। लोगों ने भगत सिंह चौक पर रांची-खूंटी-चाईबासा सड़क को जाम कर दिया और हमलावरों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। उस समय किसी को यह नहीं पता था कि हमलावर कौन हैं।
खूंटी फादर बारला हमला जांच: सीसीटीवी ने खोला राज
पुलिस के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज में तीन नकाबपोश युवक मोटरसाइकिल पर स्कूल परिसर में आते दिखे। खूंटी के पुलिस अधीक्षक ऋषभ गर्ग ने बताया कि जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाया गया था, जिसने तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और पूछताछ के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई। पुलिस ने 48 घंटे के अंदर तीन नाबालिगों को गिरफतार कर लिया, जबकि चौथा आरोपी फरार है और उसकी तलाश जारी है।
पुलिस की जांच में जो सामने आया, वह अलग था। पुलिस के अनुसार, चारों आरोपी उसी स्कूल के पूर्व छात्र हैं, जो मेले में जाने के लिए पैसे चुराने परिसर में घुसे थे। उन्हें पता था कि प्रिंसिपल अपना पैसा कहां रखते हैं — वे पहले भी 500 से 1,000 रुपये तक की छोटी रकमें चुरा चुके थे।
लेकिन इस बार सब कुछ बदल गया। फादर बारला अचानक उनके सामने आ गए। पुलिस के मुताबिक, पकड़े जाने के डर से एक आरोपी ने कुदाल जैसे छोटे हथियार से उनके माथे और कनपटी पर वार कर दिया।
पूरा घटनाक्रम करीब 30 मिनट में खत्म हुआ, और आरोपी स्कूल कार्यालय से सामान लेकर भाग गए।
पुलिस अधीक्षक ऋषभ गर्ग ने इस मामले में जो कहा, वह इस कहानी का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा है।
वे परिसर में घुसे थे और उन्हें पिता के वहां होने की उम्मीद नहीं थी। जब उन्होंने उन्हें देखा, तो वे घबरा गए कि वे उन्हें पहचान लेंगे और उन्हें जेल जाना पड़ेगा।
यह बयान साफ करता है कि यह हमला पहले से सोची-समझी हिंसा नहीं, बल्कि चोरी के दौरान घबराहट में किया गया वार था। फिर भी, इसका नतीजा एक पादरी के लिए जानलेवा साबित हुआ, जो उस रात सिर्फ इसलिए अकेले थे क्योंकि उनका साथी अपनी मां को विदा करने गया था।
खूंटी स्कूल हमला बरामदगी: 85,747 रुपये और मोबाइल फोन मिले
आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने 85,747 रुपये नकद, मोबाइल फोन और चुराए गए पैसों से खरीदी गई चीजें बरामद कीं। चौथे आरोपी की भूमिका और उम्र उसकी गिरफ्तारी के बाद ही स्पष्ट होगी।
इधर, चर्च की ओर से भी संयम का संदेश आया। कोटि धर्मप्रांत के विकार जनरल बिसु बेंजामिन ने कहा कि चर्च किसी पर आरोप लगाने से पहले प्रशासन और पुलिस की जांच का इंतजार करेगा।
हम यह अनुमान नहीं लगाना चाहते कि इसके पीछे कौन हो सकता है। हम प्रशासन और पुलिस की जांच का इंतजार करेंगे। हम नहीं चाहते कि अफवाहें फैलें और समाज में विभाजन पैदा हो।
यह रुख उस समय और भी मायने रखता है, जब देश के कई हिस्सों में ईसाई समुदाय पर हमलों की खबरें आ रही हैं। पश्चिम बंगाल में तीन ईसाई परिवारों पर हुए कथित हमले के बाद जहां गुस्सा और राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई थी, वहीं खूंटी में चर्च ने जांच पर भरोसा जताया है। इसी तरह, राजस्थान में धर्मांतरण के झूठे आरोप में गिरफ्तार 13 ईसाइयों की रिहाई ने भी दिखाया था कि सच्चाई सामने आने में वक्त लगता है, पर वह आती जरूर है।
23 अक्टूबर तक मिली जानकारी के अनुसार, उनकी हालत में सुधार हुआ था, लेकिन वे गंभीर बने हुए थे और उन्हें होश नहीं आया था। जो समुदाय सड़क जाम करके गिरफतारी मांग रहा था, वही अब उनके ठीक होने की दुआ कर रहा है।
खूंटी पादरी हमला: पूर्व छात्रों की गिरफ्तारी से क्या सबक
इस मामले ने एक असहज सवाल भी खड़ा किया है। जिन बच्चों को फादर बारला ने कभी पढ़ाया था, वे ही उनके स्कूल में चोरी करने पहुंचे — और एक पल की घबराहट ने एक शिक्षक की जान खतरे में डाल दी। मणिपुर में ईसाई समुदाय पर हुए हमलों की तरह यह मामला भी बताता है कि छोटे-छोटे विवाद और लालच कैसे बड़ी त्रासदी में बदल जाते हैं।
पुलिस की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। चौथा आरोपी फरार है, और चोरी की योजना की पूरी कहानी आना बाकी है। लेकिन एक बात साफ है: यह किसी बड़ी साजिश का नहीं, बल्कि चार नाबालिगों की चोरी का मामला था, जो भयानक मोड़ ले बैठा।
और अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब फादर बारला होश में आएंगे, तो वे उन बच्चों के बारे में क्या कहेंगे जिन्हें उन्होंने कभी अपना छात्र माना था — क्या वे माफी की बात करेंगे, या न्याय की, और क्या खूंटी का समुदाय इस घाव को भर पाएगा?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हमला 20 अक्टूबर 2026 की रात करीब 8:30 से 9 बजे के बीच खूंटी के आरसी बॉयज मिडिल स्कूल परिसर में हुआ। फादर बारला अगली सुबह, 21 अक्टूबर को, बेहोश और गंभीर रूप से घायल पाए गए (इंडियन एक्सप्रेस)।
पुलिस ने 48 घंटे के अंदर तीन नाबालिगों को हिरासत में लिया है, जिनकी उम्र 13, 14 और 15 साल है। चारों आरोपी उसी स्कूल के पूर्व छात्र हैं, और चौथा आरोपी फरार है (इंडियन एक्सप्रेस, आईएएनएस)।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी मेले में जाने के लिए पैसे चुराने स्कूल में घुसे थे। फादर बारला के अचानक सामने आने पर वे घबरा गए और एक आरोपी ने कुदाल जैसे हथियार से वार कर दिया (इंडियन एक्सप्रेस)।
आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने 85,747 रुपये नकद, मोबाइल फोन और चुराए गए पैसों से खरीदी गई चीजें बरामद की हैं (आईएएनएस)।
23 अक्टूबर तक मिली जानकारी के अनुसार, उनकी हालत में सुधार हुआ था, लेकिन वे गंभीर बने हुए थे और उन्हें होश नहीं आया था। वे रांची के पल्स अस्पताल में इलाज करा रहे हैं (इंडियन एक्सप्रेस)।
🔔 Don't Miss the Next Story!
Get breaking Christian news on your phone before everyone else — allow notifications when prompted, or join our newsletter below!
But the most surprising part of this story is yet to come — keep reading.
🙏 Have a Testimony to Share?
Has God done something amazing in your life? Or want us to cover a specific story? Send your testimony or story request via WhatsApp — your story could encourage thousands!
💬 Comments
Share your thoughts below. Be kind and respectful. If this story touched you, let us know in the comments!