बठिंडा में आज ग्रेट रिवाइवल मीटिंग: निहंग सिंहों के विरोध के बीच ईसाई प्रार्थना सभा

बठिंडा में आज शाम एक बड़ा मैदान भरने की तैयारी है, और उससे पहले ही शहर में बहस छिड़ गई है। PUDA ग्राउंड के पास रिंग रोड पर शाम 6:00 बजे से रात 10:00 बजे तक ग्रेट रिवाइवल मीटिंग प्रस्तावित है, और आयोजकों ने लोगों को परिवार सहित आने का निमंत्रण दिया है। मगर सभा से कई दिन पहले ही निहंग सिंहों ने विरोध दर्ज करा दिया था, और अब नजर इस बात पर है कि शाम को मैदान में क्या होता है।
यह सभा Amrit Sandhu Ministries की ओर से आयोजित की जा रही है, जो The Church of Salvation, Healing and Prophecy से जुड़ी मिनिस्ट्री है, और इसका नेतृत्व पास्टर अमृत संधू और पास्टर अर्चना संधू करते हैं। निमंत्रण के अनुसार, सभा में लोगों को यीशु मसीह की खुशखबरी सुनने और आशा पाने के लिए बुलाया गया है। प्रचार के जरिए लोगों तक निमंत्रण पहुंचाया गया, और सभा के लिए संपर्क नंबर भी सार्वजनिक किया गया, और आयोजन की जानकारी देने वाले पन्ने पर तारीख, समय और स्थान साफ लिखे हैं: बुधवार, 28 अक्टूबर 2026, शाम 6:00 से रात 10:00 बजे तक, PUDA ग्राउंड, कैंट पुलिस स्टेशन के पास, रिंग रोड, बठिंडा, पंजाब।
ग्रेट रिवाइवल मीटिंग — बुधवार, 28 अक्टूबर 2026, शाम 6:00 से रात 10:00 बजे तक, PUDA ग्राउंड, कैंट पुलिस स्टेशन के पास, रिंग रोड, बठिंडा।
ऊपर लिखी जानकारी वही है जो सभा के निमंत्रण में छपी है, और इसी निमंत्रण के आधार पर लोग शाम को मैदान में पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं। आयोजकों ने सभा को विशेष सभा बताया है, जहां परिवार एक साथ प्रार्थना में शामिल हो सकते हैं। निमंत्रण में किसी विवाद का जिक्र नहीं है, और न ही इसमें विरोध के बारे में कुछ कहा गया है।
निहंग सिंहों का विरोध: एडीसी को मांगपत्र और धर्म परिवर्तन का आरोप
विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर 2026 को हुई, जब दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार निहंग सिंहों ने बठिंडा में प्रस्तावित ईसाई प्रार्थना सभा का विरोध किया। उन्होंने अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) को मांगपत्र सौंपकर 28 अक्टूबर की सभा को अनुमति न देने की मांग की। मांगपत्र में उनका आरोप यह था कि ऐसी सभाओं के माध्यम से लोगों का धर्म परिवर्तन करवाने के प्रयास किए जाते हैं, और उन्होंने प्रशासन से इस मामले को गंभीरता से लेने और समय रहते उचित कार्रवाई करने की मांग की।
यह आरोप प्रदर्शनकारियों का है, और इसे तथ्य के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए, क्योंकि सभा के आयोजकों की ओर से इस आरोप पर कोई प्रतिक्रिया रिपोर्ट में दर्ज नहीं है। जागरण की रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि निहंग सिंहों ने मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए सभा पर आपत्ति जताई और प्रशासन से कार्रवाई की अपील की, और रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया है कि प्रशासन ने सभा को अनुमति दी, रोका या रद्द किया, और इस बारे में कोई दावा करना सही नहीं होगा। जो कुछ साफ है, वह यह है: विरोध दर्ज हुआ, मांगपत्र सौंपा गया, और सभा आज शाम के लिए प्रस्तावित है।
इस तरह के विवाद पंजाब में पहले भी सुर्खियों में आए हैं, और हर बार यही सवाल उठता है कि प्रार्थना सभा और धर्म परिवर्तन के आरोप के बीच रेखा कहां है। हाल के हफ्तों में भारत में ईसाई समुदाय से जुड़ी कई खबरें आई हैं, जिनमें पश्चिम बंगाल में तीन ईसाई परिवारों पर हमले का मामला भी शामिल है, जहां धर्म बदलने के दबाव का आरोप लगा था। बठिंडा का मामला उससे अलग है, क्योंकि यहां अभी तक कोई हिंसा या हमला रिपोर्ट नहीं हुआ है, और विवाद कागज पर दर्ज मांगपत्र तक सीमित है, फिर भी दोनों खबरों में एक ही चिंता दिखती है: लोग अपनी आस्था का इजहार कहां और कैसे कर सकते हैं।
बठिंडा सभा से पहले: प्रशासन की भूमिका और आगे क्या होगा
सभा से पहले सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की भूमिका को लेकर है, और इस सवाल का जवाब अभी किसी रिपोर्ट में नहीं आया है, और जागरण की रिपोर्ट में मांगपत्र सौंपे जाने की बात है, मगर इसमें प्रशासन के किसी फैसले का जिक्र नहीं है। इसलिए सभा को यहां केवल "प्रस्तावित" कहा गया है, और इसके होने के बारे में कोई दावा नहीं किया गया है। शाम 6:00 बजे के बाद ही यह साफ होगा कि मैदान में क्या हुआ, और तब तक हर बात अटकल ही रहेगी।
पंजाब में बड़ी धार्मिक सभाओं का अपना इतिहास है, और बठिंडा की यह सभा उसी परंपरा में आती है, जहां लोग खुले मैदान में प्रार्थना के लिए जुटते हैं। इसी तरह, सरधना चर्च की तीर्थयात्रा में लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की खबर ने दिखाया था कि ऐसे आयोजनों में भागीदारी कितनी बड़ी होती है। बठिंडा की सभा का पैमाना उससे छोटा है, मगर इसके लिए भी लोगों तक निमंत्रण पहुंचाया गया है, जबकि प्राथना सभा के लिए लोगों का जुटना ही इस आयोजन की पहचान है, और विरोध के बावजूद निमंत्रण वापस नहीं लिया गया है।
आज शाम बठिंडा में क्या देखना होगा
आज शाम पहली बात यह देखनी होगी कि सभा तय समय पर शुरू होती है या नहीं, और मैदान में लोग पहुंचते हैं या नहीं। दूसरी बात यह होगी कि प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था या बयान सामने आता है या नहीं, क्योंकि अब तक इस बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। तीसरी बात यह होगी कि विरोध करने वाले समूह शाम को क्या रुख अपनाते हैं, क्योंकि उनका मांगपत्र पहले ही प्रशासन तक पहुंच चुका है, और इन तीनों सवालों के जवाब आज रात तक सामने आ सकते हैं।
भारत में ईसाई समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों पर नजर रखने वाली खबरों में बढ़ते दबाव के बीच कलीसिया के टिके रहने की कहानी और छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती जैसी रिपोर्टें भी शामिल हैं, और बठिंडा का मामला उसी बड़ी तस्वीर का एक छोटा हिस्सा है। हर मामले में सवाल एक ही है: आस्था के इजहार की आजादी और कानून की सीमा के बीच संतुलन कैसे बने। बठिंडा में आज शाम जो होगा, वह इस सवाल का एक और जवाब होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ग्रेट रिवाइवल मीटिंग बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को शाम 6:00 से रात 10:00 बजे तक PUDA ग्राउंड, कैंट पुलिस स्टेशन के पास, रिंग रोड, बठिंडा, पंजाब में प्रस्तावित है।
दैनिक जागरण की 23 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, निहंग सिंहों ने अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) को मांगपत्र सौंपकर प्रस्तावित सभा को रद्द करने की मांग की, यह आरोप लगाते हुए कि ऐसी सभाओं के माध्यम से धर्म परिवर्तन के प्रयास किए जाते हैं।
रिपोर्टों में प्रशासन के किसी फैसले का जिक्र नहीं है, इसलिए इस बारे में कोई दावा नहीं किया जा सकता; सभा को केवल प्रस्तावित कहा गया है, और इसका होना या न होना शाम को ही साफ होगा।
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