पश्चिम बंगाल में 3 ईसाई परिवारों पर हमला: धर्म बदलने का दबाव, 14 साल की लड़की से मारपीट का आरोप

तीन घर, तीन पति — और एक ही सुबह। 20 अक्टूबर की सुबह 7:30 बजे पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले में तीन ईसाई परिवारों के घरों से पतियों को एक-एक करके ले जाया गया, और पीछे बची महिलाओं से कहा गया कि अब उन्हें 'रस्मों' के लिए मंदिर ले जाया जाएगा। यह किसी फिल्म का दृश्य नहीं था — यह तीन दिन की दहशत का चरम था, जिसके पीछे तीन परिवार खड़े हैं जो एक ही बात पर डटे हैं: वे अपना विश्वास नहीं छोड़ेंगे।
कहानी 18 अक्टूबर से शुरू होती है, जब एक परिवार के घर भीड़ आई — मांग सीधी और साफ थी: ईसाइयत छोड़ दो। परिवार ने इनकार किया, और इनकार की कीमत चुकानी पड़ी: एक महीला को सिर पर इतनी जोर से मारा गया कि वह बेहोश हो गई। फिर जो हुआ वह किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक है — 'शुद्धिकरण अनुष्ठान' के नाम पर उस बेहोश महिला को नहाने के लिए मजबूर किया गया।
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि 18 से 20 अक्टूबर 2026 के बीच बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उन्हें आतंकित किया, पीटा और लगातार ईसाइयत छोड़ने का दबाव डाला। ये आरोप चंद्रकोणा थाने के अधिकार क्षेत्र के गाँवों से आए हैं, और अब इनकी जाँच की माँग उठ रही है।
पश्चिम बंगाल ईसाई परिवार हमला: 18 से 20 अक्टूबर की पूरी कहानी
19 अक्टूबर को पीड़ितों को दुर्गा पूजा पंडाल में अंजलि देने के लिए मजबूर किया गया। उसी दिन चंद्रकोणा थाने के इलाके में सबसे दर्दनाक घटना हुई — 14 वर्षीय लड़की का गला दबाया गया, उसके कपड़े फाड़े गए। अपहरण और बलात्कार की धमकी के बाद परिवार ने उस लड़की को किसी दूसरी जगह भेज दिया है — आज वह घर से दूर किसी अनजान जगह छिपी है, क्योंकि उसका अपना घर अब उसके लिए सुरक्षित नहीं रहा।
मामले को संभाल रहे वकील के शब्दों में, यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है:
«इलाके में तीन परिवारों को निशाना बनाया गया। एक परिवार में करीब 14 साल की लड़की का गला दबाया गया और उसके कपड़े सबके सामने फाड़ दिए गए। हमलावरों ने उसे अगवा करने और बलात्कार की धमकी दी। उसके परिवार ने उसे किसी दूसरी जगह भेज दिया है।» — मामले के वकील, मकतूब मीडिया के माध्यम से
फिर आई 20 अक्टूबर की सुबह — लगभग 7:30 बजे तीनों परिवारों के पतियों को ले जाया गया। परिवारों का कहना है कि उन्हें साफ धमकी दी गई: अगर वे पुलिस के पास गए, तो उन्हें आग लगा दी जाएगी। पश्चिम बंगाल में ईसाइयों के खिलाफ पहले भी हमले सामने आ चुके हैं, लेकिन इस बार आरोप और भी गंभीर हैं।
14 साल की लड़की से मारपीट और पुलिस की भूमिका
इन परिवारों ने हिम्मत करके जब पूलीस से मदद मांगी, तो अधिकारियों का जवाब सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मामले के वकील का कहना है कि पुलिस ने मदद करने की बजाय परिवारों को उसी समूह की बात मानने की सलाह दे डाली, जिससे वे भागना चाहते थे।
«जब उन्होंने पुलिस से मदद मांगी, तो अधिकारियों ने कहा कि अगर उन्हें जीना है तो उस समूह की बात मानें।» — मामले के वकील, मीडिया रिपोर्टों के अनुसार
वकील के अनुसार ये परिवार अपना विश्वास नहीं छोड़ना चाहते, लेकिन पुलिस ने भी उन्हें परेशान किया है — इसलिए वे पहले गाँव से बाहर निकलना चाहते हैं, और उसके बाद ही शिकायत दर्ज कराएंगे। भारत में मसीही सताव 2026 की खबरों में पुलिस की भूमिका का सवाल बार-बार उठता आया है।
बंगाल में ईसाई उत्पीड़न 2026: 60 घटनाओं का आंकड़ा
यह कोई अकेली घटना नहीं है: इंडिया हेट लैब की रिपोर्ट के अनुसार 13 मई से 20 सितंबर 2026 के बीच पश्चिम बंगाल के 13 जिलों में ईसाइयों के खिलाफ कम से कम 60 घटनाएं दर्ज हुई हैं। रिपोर्ट कहती है कि राज्य में भाजपा के सत्ता में आने के बाद ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं — यानी औसतन हर दो दिन में एक घटना।
आंकड़ों के पीछे एक बड़ा सवाल छिपा है: यह सिलसिला रुकेगा कैसे? सताव के बीच भारत में बढ़ती कलीसिया की कहानियाँ बताती हैं कि दबाव बढ़ने के बावजूद विश्वास की जड़ें गहरी होती जा रही हैं, लेकिन हर कहानी के पीछे असली इंसानी कीमत होती है — जैसे इस मामले में वह 14 साल की लड़की, जो आज अपने घर से दूर है।
उपाय का रास्ता कानून से ही निकलता है। तमिलनाडु में चर्च शिखर पर सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा जैसी हालिया राहतें दिखाती हैं कि अदालतें उत्पीड़ित कलीसियाओं के साथ खड़ी हो सकती हैं। सवाल सिर्फ इतना है कि पश्चिम मेदिनीपुर के ये तीन परिवार अदालत तक पहुँच पाएंगे या डर उन्हें पहले ही रोक लेगा।
विश्वास पर डटे तीन परिवार: आगे क्या होगा
जो परिवार डरे हुए हैं, जिनके पति ले जाए गए, जिनकी बेटी किसी दूसरे शहर में छिपी है — वे फिर भी एक बात पर कायम हैं: विश्वास नहीं छोड़ेंगे। डर है, आँसू हैं, अनिश्चितता है — लेकिन विश्वास की वह जड़ नहीं हिली है, जिसे ये परिवार सालों से सींचते आ रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है: क्या ये तीन परिवार गाँव से सुरक्षित निकल पाएंगे, क्या उनकी शिकायत दर्ज होगी, और क्या उनकी बेटी कभी घर लौट पाएगी? इन सवालों के जवाब अभी आने बाकी हैं — और जब आएंगे, यह खबर अपडेट की जाएगी। विश्वास के लिए कितनी कीमत चुकानी होगी?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तीन ईसाई परिवारों ने आरोप लगाया है कि 18 से 20 अक्टूबर 2026 के बीच बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उन्हें डराया, पीटा और ईसाइयत छोड़ने का दबाव डाला। एक महिला को मारकर बेहोश किया गया, 14 साल की लड़की से मारपीट हुई, और 20 अक्टूबर की सुबह 7:30 बजे तीनों परिवारों के पतियों को घर से ले जाया गया।
चंद्रकोणा थाने के अधिकार क्षेत्र में एक 14 वर्षीय लड़की का गला दबाया गया और उसके कपड़े फाड़े गए। हमलावरों ने उसे अगवा करने और बलात्कार की धमकी दी, जिसके बाद परिवार ने उसे किसी दूसरी जगह भेज दिया है।
परिवारों और उनके वकील का आरोप है कि पुलिस से मदद मांगने पर अधिकारियों ने कहा कि 'अगर जीना है तो उस समूह की बात मानें'। परिवारों का यह भी कहना है कि शिकायत करने पर उन्हें आग लगाने की धमकी दी गई थी, और पुलिस ने भी उन्हें परेशान किया।
इंडिया हेट लैब की रिपोर्ट के अनुसार 13 मई से 20 सितंबर 2026 के बीच पश्चिम बंगाल के 13 जिलों में ईसाइयों के खिलाफ कम से कम 60 घटनाएं दर्ज हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में भाजपा के सत्ता में आने के बाद ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं।
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