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📰 FaithStories News Desk · Article #637 · Published: 08 Nov 2026, 01:00 AM UTC

69 साल के पादरी ने केरल चर्च में खोला ओपन जिम

केरल के त्रिशूर में सेंट जोसेफ चर्च के परिसर में सुबह खुले जिम में व्यायाम करते लोग, पीछे चर्च की इमारत और पेड़, कोई टेक्स्ट नहीं
त्रिशूर के कुरियाचिरा में सेंट जोसेफ चर्च ने परिसर में ओपन जिम खोला है; 69 वर्षीय फादर फ्रेडरिक एलुवथिंगल 51 साल से व्यायाम कर रहे हैं।

केरल के त्रिशूर में सेंट जोसेफ चर्च, कुरियाचिरा ने अपने परिसर के एक कोने में ओपन जिम खोल दिया है। चर्च के 69 वर्षीय विकार फादर फ्रेडरिक एलुवथिंगल 51 साल से रोज़ व्यायाम कर रहे हैं, और अब उनकी कलीसिया भी उनके साथ पुश-अप्स और पुल-अप्स करने लगी है।

जिम का कोई तय समय नहीं है। लोग अपनी सुविधा से आते हैं, और कई लोग पवित्र मिस्सा के बाद सीधे जिम की ओर चल पड़ते हैं।

प्रार्थना के बाद पसीना। यही इस चर्च की नई पहचान बन गई है।

यह जिम कोई बड़ी इमारत नहीं है। चर्च परिसर में एक कुएं के आसपास की जगह को चुना गया, पहले पैरेलल बार लगाए गए, फिर बास्केटबॉल का हूप आया। धीरे-धीरे यह एक सामुदायिक जिम बन गया, जहाँ हर उम्र के लोग आते हैं।

51 साल की आदत, एक चर्च की नई शुरुआत

फादर एलुवथिंगल छात्र जीवन में फुटबॉलर और बास्केटबाल खिलाड़ी थे। उन्होंने कहा है, "मैं पिछले 51 साल से व्यायाम कर रहा हूँ, पुणे के पेपल सेमिनरी के दिनों से।" उनकी यह आदत रोम और यरूशलेम में पढ़ाई के दौरान भी जारी रही, और ऑस्ट्रेलिया में चर्च की सेवा के समय भी नहीं टूटी।

एक साल से कुछ ज़्यादा समय पहले जब वे कुरियाचिरा आए, तो उन्होंने अपने रोज़ के व्यायाम के लिए जगह तलाशनी शुरू की। पुश-अप्स और पुल-अप्स के लिए उन्हें जगह चाहिए थी, और चर्च परिसर ने वह जगह दे दी।

उन्होंने कहा, "मैं एक ऐसी जगह बनाना चाहता था जहाँ लोग व्यायाम की आदत डाल सकें। आम तौर पर हमारी व्यायाम की संस्कृति मज़बूत नहीं है। अगर लोग चर्च आते समय थोड़ा बुनियादी व्यायाम कर लें, तो धीरे-धीरे फिटनेस उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बन सकती है।"

यह बात सिर्फ़ सेहत की नहीं है। आज जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ और मोटापा बढ़ रहे हैं, और चर्च इस पहल से युवाओं को चर्च की गतिविधियों से जोड़ना भी चाहता है।

60 वेदी सेवक, बच्चे और बुज़ुर्ग — सब आ रहे हैं

जिम खुलते ही लोगों ने आना शुरू कर दिया। चर्च के लगभग 60 वेदी सेवक (altar boys) इसके नियमित उपयोगकर्ता बन गए हैं। माता-पिता अपने छोटे बच्चों को भी साथ लाते हैं, और बुज़ुर्ग बुनियादी उपकरणों से खुद को सक्रिय रखते हैं।

चर्च के ट्रस्टी पी. आर. विल्सन ने कहा, "जिम शुरू होने के एक हफ़्ते के भीतर ही काफ़ी लोग आने लगे। अगर माँग बढ़ती है, तो हमें इसके विस्तार के बारे में सोचना होगा।"

नियमित उपयोगकर्ताओं में से एक जॉन वझाप्पिल्ली पास में रहने वाले रियल एस्टेट ब्रोकर हैं। उन्होंने कहा, "मैं पिछले एक हफ़्ते से हर शाम यहाँ आ रहा हूँ। एक दुर्घटना और सर्जरी के बाद मेरे पैर की मांसपेशियाँ कमज़ोर हो गई थीं। मैं उन्हें मज़बूत करना चाहता हूँ। यह व्यायाम के लिए आरामदायक जगह है, ताज़ी हवा और खुला परिसर है।"

कुरियाचिरा में जगह कम थी, इसलिए जिम मामूली ही बन पाया। लेकिन प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही है, और चर्च के लोग इसे अपनी रोज़ की ज़िंदगी का हिस्सा बना रहे हैं।

स्वस्थ मन और शरीर भी एक आध्यात्मिक सेवा है

चर्च इस पहल को सिर्फ़ एक फिटनेस सुविधा नहीं मानता। सहायक विकार फादर जीस अक्कारा ने कहा, "हम एक स्वस्थ पीढ़ी तैयार करना चाहते हैं। कई लोग जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित हैं, जबकि युवा अक्सर निजी फिटनेस केंद्रों की ओर जाते हैं। हमें लगा कि यहाँ बुनियादी सुविधाएँ देने से समुदाय को फ़ायदा होगा। आध्यात्मिकता स्वस्थ मन और शरीर के पोषण के बारे में भी है। हम इसे आध्यात्मिक सेवा का एक रूप मानते हैं।"

फादर एलुवथिंगल का एक और मकसद भी है। उन्होंने कहा, "आजकल युवा शायद ही कभी चर्च आते हैं या उसकी गतिविधियों में भाग लेते हैं। यह उन्हें चर्च समुदाय में लाने का एक अवसर भी है।"

यह सोच भारत के दूसरे चर्चों की कहानियों से अलग है, जहाँ अक्सर दबाव और मुश्किलों की खबरें आती हैं। कुरियाचिरा में चर्च ने एक छोटा-सा कदम उठाया, और वह कदम अब पूरे मोहल्ले को हिला रहा है।

भारत के चर्चों में एक अलग तस्वीर

इसी हफ़्ते भारत के चर्चों से कई तरह की खबरें आई हैं। कवर्धा में 18 गाँवों ने 40 अवैध चर्चों पर कार्रवाई की माँग की, जैसा कि कवर्धा: 18 गांवों ने 40 अवैध चर्चों पर कार्रवाई मांगी में बताया गया, और मालदा में प्रार्थना सभा पर हमला हुआ, जैसा कि मालदा में प्रार्थना सभा पर हमला: घर चर्च में तोड़फोड़ में दर्ज है।

लेकिन कुरियाचिरा की कहानी दूसरी दिशा दिखाती है। मंगलुरु में CBAI बाइबिल सम्मेलन शुरू हुआ, जैसा कि मंगलुरु में आज CBAI बाइबिल सम्मेलन शुरू, नौ शोध पत्र में बताया गया, और कोलकाता में सैकड़ों ईसाई प्रार्थना रैली के लिए सड़कों पर उतरे, जैसा कि कोलकाता प्रार्थना रैली: सैकड़ों ईसाई सड़कों पर, 48 हमले में दर्ज है।

मणिपुर के नोनी में हुई गोलीबारी में 3 ईसाई मारे गए, जैसा कि मणिपुर के नोनी में नागा गुटों की गोलीबारी, 3 ईसाई मारे गए में बताया गया। इन सबके बीच, एक चर्च ने अपने परिसर में जिम खोलकर यह दिखाया है कि कलीसिया का जीवन सिर्फ़ संघर्ष नहीं, सेवा और सेहत भी है।

यह जिम शायद कभी बड़ा नहीं बनेगा। लेकिन हर शाम जब एक 69 साल का पादरी पुल-अप्स करता है, तो उसके पीछे खड़े 60 वेदी सेवक कुछ सीखते हैं जो किसी उपदेश में नहीं मिलता।

अगली सुबह जब चर्च की घंटी बजेगी, तो कुछ लोग प्रार्थना के लिए आएँगे, और कुछ लोग प्रार्थना के बाद पसीना बहाने के लिए। कुरियाचिरा में अब ये दोनों एक ही रास्ते पर चलते हैं, और कोई नहीं कह सकता कि आगे क्या होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुरियाचिरा चर्च का जिम कहाँ है?

यह जिम केरल के त्रिशूर में सेंट जोसेफ चर्च, कुरियाचिरा के परिसर में है। इसे परिसर के एक कोने में, एक कुएं के आसपास की जगह पर बनाया गया है।

जिम किसने शुरू किया?

जिम चर्च के 69 वर्षीय विकार फादर फ्रेडरिक एलुवथिंगल की पहल से शुरू हुआ। वे छात्र जीवन में फुटबॉलर और बास्केटबॉल खिलाड़ी थे।

फादर एलुवथिंगल कितने साल से व्यायाम कर रहे हैं?

फादर एलुवथिंगल ने कहा है कि वे पिछले 51 साल से व्यायाम कर रहे हैं, पुणे के पेपल सेमिनरी के दिनों से। उनकी आदत रोम, यरूशलेम और ऑस्ट्रेलिया में भी जारी रही।

जिम का समय क्या है?

जिम का कोई तय समय नहीं है। लोग अपनी सुविधा से आते हैं, और कई लोग पवित्र मिस्सा के बाद व्यायाम करते हैं।

चर्च ने जिम क्यों खोला?

चर्च एक स्वस्थ पीढ़ी तैयार करना चाहता है और युवाओं को चर्च समुदाय से जोड़ना चाहता है। सहायक विकार फादर जीस अक्कारा ने कहा कि स्वस्थ मन और शरीर का पोषण भी आध्यात्मिक सेवा का एक रूप है।

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