ताज़ा: राजस्थान में 13 ईसाई 4 महीने बाद जेल से रिहा — धर्मांतरण के झूठे आरोप में गिरफ्तार पास्टर और 12 विश्वासी आज़ाद

एक सौ बीस दिन, एक ही प्रार्थना। जून 2026 में राजस्थान के एक तीन-दिवसीय आराधना सम्मेलन में हिंदू चरमपंथी समूह के छापे के बाद जिन 13 ईसाई विश्वासियों को जेल भेजा गया था, वे अब आज़ाद हैं — चार महीने की कैद के बाद जमानत पर रिहा। एक पास्टर और उसके 12 साथी विश्वासी, जिन पर आदिवासी लोगों को जबरन धर्मांतरित करने का झूठा आरोप लगाया गया था, अब अपने परिवारों के पास लौट आए हैं।
ओपन डोर्स यूके की 19 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, इन विश्वासियों को पुलिस की सुरक्षा मिलने की बजाय सलाखों के पीछे डाल दिया गया था। सम्मेलन में प्रार्थना करने आए लोग आरोपी बनाकर जेल भेज दिए गए।
यह खबर ओपन डोर्स के स्थानीय साझेदार सूरज ठाकुर (सुरक्षा कारणों से बदला हुआ नाम) के इन शब्दों के साथ आई, जो हर उस दिल को छू गई जो इन चार महीनों में इनके लिए प्रार्थना करता रहा:
«हम परमेश्वर की स्तुति करते हैं कि एक पास्टर और 12 साथी विश्वासियों को चार महीने जेल में बिताने के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया है। उनकी रिहाई परमेश्वर की महानता और उनकी विश्वसनीयता का जश्न मनाने का एक बड़ा कारण है।» — सूरज ठाकुर, ओपन डोर्स के स्थानीय साझेदार
राजस्थान ईसाई रिहा 2026: जून के छापे की पूरी कहानी
जून 2026 में राजस्थान में तीन दिन का एक आराधना सम्मेलन चल रहा था — भजन, प्रार्थना और संगति का समय। तभी एक हिंदू चरमपंथी समूह ने वहां छापा मारा और आरोप लगाया कि सम्मेलन में आदिवासी लोगों को जबरन ईसाइयत में बदला जा रहा था।
यही वो जगह है जहां कहानी ने मोड़ लिया। जिन्हें सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, वे आरोपी बन गए — आरोप था धर्मांतरण के जरिए धोखाधड़ी का। लेकिन ओपन डोर्स की रिपोर्ट साफ कहती है कि ये आरोप झूठे थे, और सम्मेलन में सिर्फ शांतिपूर्ण आराधना हो रही थी।
इस घटना का दर्द उस हर मसीही घर ने महसूस किया जिसने अपने किसी प्रिय को पुलिस वैन में जाते देखा। छत्तीसगढ़ में पास्टर पीतांबर सिंह की हिरासत जैसी घटनाओं की तरह, यहां भी धर्मांतरण का आरोप ही सबसे बड़ा हथियार बना।
चार महीने की कैद: जेल के भीतर विश्वास की परीक्षा
चार महीने — गर्मी की दोपहरें, बरसात की रातें, और हर दिन घर से दूर। ये 13 विश्वासियों में से हर एक के पास बताने के लिए अपनी कहानी है, लेकिन एक बात उन सभी में साझा थी: उन्होंने हार नहीं मानी। ओपन डोर्स के साझेदार की रिपोर्ट के अनुसार, यह रिहाई उनके और उनके परिवारों के लिए खुशी का बड़ा कारण है।
चार महीनों के दौरान इन विश्वासियों के परिवार घर पर थे — हर अदालती तारीख एक नई उम्मीद लेकर आती थी, और हर टलती तारीख दिल तोड़ जाती थी। भारत में मसीही सताव 2026 की खबरों में यह दर्द बार-बार सामने आया है: सताव की सबसे भारी कीमत परिवार चुकाते हैं।
धर्मांतरण कानून राजस्थान: क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे मामले
ओपन डोर्स की रिपोर्ट इस घटना को एक बड़ी तस्वीर से जोड़ती है — राजस्थान उन राज्यों में से एक है जहां धर्मांतरण-विरोधी कानून सख्त किए जा रहे हैं। इन कानूनों का घोषित मकसद जबरन धर्मांतरण रोकना है, लेकिन ओपन डोर्स के अनुसार हकीकत में ये कानून अक्सर ईसाइयों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
पैटर्न साफ है: आरोप लगता है, पुलिस आती है, और ईसाई ही गिरफ्तार होते हैं। पश्चिम बंगाल में तीन ईसाई परिवारों पर हमले के मामले में भी यही हुआ था।
राजस्थान में कानून की स्थिति और चिंताजनक है क्योंकि यहां धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार और राज्य के सख्त कानून के बीच सीधा टकराव है। वकीलों का कहना है कि ऐसे कानूनों के तहत जमानत मिलना मुश्किल हो जाता है — जैसा इन 13 विश्वासियों के मामले में हुआ।
रिहाई का दिन: प्रार्थना का जवाब
जिस दिन जमानत का आदेश आया, उस दिन की खुशी का अंदाज़ा लगाना मुश्किल है — चार महीने बाद जेल के दरवाजे से बाहर निकलने का पल।
ओपन डोर्स ने इस रिहाई को परमेश्वर की प्रार्थनाओं का उत्तर बताया है — यह हमें उनकी वफादारी की याद दिलाती है। उनके साझेदार के शब्दों में:
«हालांकि कई मसीही अपने विश्वास के लिए लंबे समय तक कैद सहते रहते हैं, हम इन भाइयों के साथ खुशी मनाते हैं क्योंकि वे अपने परिवारों और समुदायों के पास लौट आए हैं।» — सूरज ठाकुर, ओपन डोर्स
रिहाई के बाद इन विश्वासियों का स्वागत कैसा रहा, इसकी तस्वीरें सामने नहीं आई हैं — सुरक्षा कारणों से उनकी पहचान गुप्त रखी गई है। लेकिन एक बात तय है: वे टूटे नहीं, वे लौट आए।
राजस्थान के मसीहियों के लिए आगे क्या: प्रार्थना की अपील
13 की रिहाई जश्न की खबर है, लेकिन कहानी खत्म नहीं हुई है। राजस्थान में मसीही समुदाय बढ़ती शत्रुता का सामना कर रहा है — झूठे आरोप, छापे और गिरफ्तारियां, यह सिलसिला थमा नहीं है।
दबाव के बीच भारत में बढ़ती कलीसिया की कहानियां बताती हैं कि सताव के बावजूद विश्वास फैल रहा है। राजस्थान के ये 13 विश्वासी भी अब उस गवाही का हिस्सा हैं जो कहती है: कैद शरीर को रोक सकती है, विश्वास को नहीं।
ओपन डोर्स ने दुनिया भर के विश्वासियों से अपील की है कि वे राजस्थान के मसीहियों के लिए प्रार्थना जारी रखें — उनकी सुरक्षा के लिए, और उनके लिए कि वे नमक और ज्योति बनने के अवसर पाते रहें। सवाल अब यह है: क्या इन 13 की रिहाई राजस्थान में न्याय की नई शुरुआत बनेगी, या झूठे आरोपों का यह चक्र चलता रहेगा? जवाब का इंतज़ार है — और जब तक जवाब नहीं आता, प्रार्थना जारी रहेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जून 2026 में राजस्थान में एक तीन-दिवसीय आराधना सम्मेलन पर हिंदू चरमपंथी समूह ने छापा मारा और आरोप लगाया कि सम्मेलन में आदिवासी लोगों को जबरन ईसाइयत में बदला जा रहा था। पुलिस ने हमलावरों को रोकने की बजाय सम्मेलन में शामिल 13 ईसाई विश्वासियों को ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। ओपन डोर्स के अनुसार ये आरोप झूठे थे।
एक पास्टर और उसके 12 साथी विश्वासियों ने लगभग चार महीने जेल में बिताए। उन्हें अक्टूबर 2026 में जमानत पर रिहा किया गया, जिसकी खबर ओपन डोर्स ने 19 अक्टूबर 2026 को दी।
राजस्थान उन राज्यों में है जहां धर्मांतरण-विरोधी कानून सख्त किए जा रहे हैं। इन कानूनों का घोषित मकसद जबरन धर्मांतरण रोकना है, लेकिन ओपन डोर्स के अनुसार हकीकत में ये कानून अक्सर ईसाइयों को निशाना बनाने और परेशान करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, और इनके तहत जमानत मिलना मुश्किल हो जाता है।
सुरक्षा कारणों से रिहा हुए विश्वासियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। राजस्थान में मसीही समुदाय बढ़ती शत्रुता का सामना कर रहा है, इसलिए ओपन डोर्स और स्थानीय साझेदार उनकी सुरक्षा के लिए नाम और चेहरे गुप्त रखते हैं।
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