बंगाल ईसाई स्कूल चिंता: चर्चों पर हमलों के बाद RSS प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की मांग

शनिवार की सुबह सिलीगुड़ी के डॉन बॉस्को स्कूल के हॉल में जो लोग बैठे थे, उनके हाथों में पाठ्यपुस्तकों की सूची नहीं थी। उनके सामने एक और सूची थी — उन घटनाओं की, जहां प्रार्थना सभाएं तोड़ दी गईं, चर्चों पर पत्थर चले और पादरियों को धमकाया गया।
यह सम्मेलन बंगीय क्रिश्चियन परिसेवा ने वेस्ट बंगाल एसोसिएशन ऑफ क्रिश्चियन स्कूल्स के साथ मिलकर बुलाया था। बंगीय क्रिश्चियन परिसेवा ईसाई समुदाय के सभी संप्रदायों का प्रतिनिधित्व करने वाला मंच है। 11 अक्टूबर 2026 को सामने आई इस खबर के मुताबिक, प्रमुख मिशनरी शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियों पर चर्चा करने आए थे — लेकिन बात पढ़ाई से शुरू होकर समुदाय की सुरक्षाा पर आ ठहरी।
सम्मेलन के अंत में एक घोषणा हुई, जिसने सबका ध्यान खींचा: ये स्कूल अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात का समय मांगेंगे। अपील सरल थी — राज्य में ईसाई समुदाय के लोगों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित की जाए।
मोहन भागवत से मुलाकात क्यों चाहते हैं बंगाल के ईसाई स्कूल
आयोजकों में से एक ने बताया कि भागवत की न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान बहुलवाद पर हाल की टिप्पणियों से उन्हें प्रोत्साहन मिला है। यह उस व्यक्ति की बात है, जिसके शब्दों ने इन स्कूलों को उम्मीद की एक किरण दी — और अब उसी व्यक्ति से मुलाकात की मांग की जा रही है।
"हम पश्चिम बंगाल में ईसाई समुदाय की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए भागवत से हस्तक्षेप की अपीील करना चाहते हैं।"
मोहन भागवत इस पूरी कहानी के केंद्र में हैं। एक तरफ हैं वो स्कूल, जो आम तौर पर राजनीति से दूर रहकर सिर्फ बच्चों को पढ़ाने में लगे हैं। दूसरी तरफ हैं भागवत — संघ के प्रमुख, जिनकी एक टिप्पणी ने इन स्कूलों को भरोसा दिलाया कि बातचीत का रास्ता खुला हो सकता है। अब सवाल यह है: क्या वे इस मुलाकात के लिए हामी भरेंगे?
जलालखली चर्च पर तोड़फोड़ और प्रार्थना सभाओं पर हमले: किन घटनाओं का ज़िक्र हुआ
आयोजकों के अनुसार, नदिया जिले के कृष्णानगर में सेंट लुई कैथोलिक चर्च पर शुक्रवार को एक समूह ने धर्मांतरण के आरोप लगाकर तोड़फोड़ की, और मामला टकराव तक बढ़ गया। ये आरोप अभी जांच के दायरे में हैं — इनकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
नदिया के जलालखली में यह पहली ऐसी घटना नहीं है। इससे पहले नदिया के जलालखली में बाइबल सम्मेलन पर हुए हमले में 1,900 आदिवासी ईसाइयों को घर भेजना पड़ा था। वही जगह, वही डर — और अब एक और चर्च निशाने पर।
इसके अलावा बंगीय क्रिश्चियन परिसेवा ने पहले पश्चिम मेदिनीपुर के दान्तन और हावड़ा के उलूबेरिया में प्रार्थना सभाओं पर कथित हमलों की भी शिकायत की थी। आयोजकों का आरोप है कि श्रद्धालुओं और पादरियों को धमकाया गया, उनके साथ मारपीट हुई, और रोकने वालों की तरफ से बार-बार धर्मांतरण के आरोप लगाए गए। पश्चिम मेदिनीपुर में तीन ईसाई परिवारों पर हमले और धर्म बदलने के दबाव के आरोप भी इसी सिलसिले की कड़ी हैं।
आरएसएस का जवाब: आरोपों का खंडन
रिपोर्टों के अनुसार, आरएसएस के एक प्रवक्ता ने इन आरोपों का खंडन किया है। प्रवक्ता का कहना था कि ईसाई स्कूलों को पर्याप्त सुरक्षा कवच मिला हुआ है और उन्हें कोई खतरा नहीं है।
यानी तस्वीर दोतरफा है: एक तरफ स्कूल कह रहे हैं कि हमले हो रहे हैं, दूसरी तरफ संघ कह रहा है कि खतरा नहीं है। भारत में पादरियों पर हमलों की ऐसी घटनाएं पहले भी सुर्खियों में रही हैं — झारखंड में फादर बेनेडिक्ट बारला पर हमला इसका एक उदाहरण है। सच किसके पक्ष में है, यह आधिकारिक जांच ही बताएगी।
आगे क्या होगा: मुलाकात का इंतज़ार और बढ़ती निगाहें
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मोहन भागवत इस अपील का क्या जवाब देंगे। क्या सिलीगुड़ी के उस हॉल में बैठे प्रतिनिधियों को मिलने का समय मिलेगा? और अगर मुलाकात हो जाती है, तो क्या बंगाल के चर्चों, स्कूलों और प्रार्थना सभाओं में फिर से वैसा ही सुकून लौटेगा, जैसा इन स्कूलों के गलियारों में कभी हुआ करता था?
जवाब अभी अधूरा है। लेकिन एक बात तय है — इस कहानी की अगली कड़ी उस मुलाकात से शुरू होगी, जिसका इंतज़ार अब पूरे समुदाय को है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चर्चों, प्रार्थना सभाओं और पादरियों पर कथित हमलों के बाद समुदाय की सुरक्षा और गरिमा के लिए हस्तक्षेप की अपील करने हेतु — आयोजकों ने भागवत की न्यूयॉर्क में बहुलवाद पर टिप्पणियों से प्रोत्साहित होकर मुलाकात का समय मांगा है (IBC24/भाषा, टेलीग्राफ इंडिया — 11/10/2026)।
शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को सिलीगुड़ी के डॉन बॉस्को स्कूल में। इसका आयोजन बंगीय क्रिश्चियन परिसेवा और वेस्ट बंगाल एसोसिएशन ऑफ क्रिश्चियन स्कूल्स ने मिलकर किया था।
आयोजकों के अनुसार, नदिया के कृष्णानगर में सेंट लुई कैथोलिक चर्च पर शुक्रवार को कथित तोड़फोड़, और दान्तन (पश्चिम मेदिनीपुर) व उलूबेरिया (हावड़ा) में प्रार्थना सभाओं पर हमले — ये आयोजकों के आरोप हैं, आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
रिपोर्टों के अनुसार आरएसएस के एक प्रवक्ता ने आरोपों का खंडन किया और कहा कि ईसाई स्कूलों को पर्याप्त सुरक्षा मिली हुई है और उन्हें कोई खतरा नहीं है।
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