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📰 FaithStories News Desk · Article #146 · Published: 22 Oct 2026, 05:36 PM PKT

आज: झारखंड के खूंटी में फादर बेनेडिक्ट बारला पर जानलेवा हमला — गंभीर हालत, रांची रेफर

झारखंड के खूंटी में शाम के समय एक छोटे से कैथोलिक चर्च के बाहर प्रार्थना में मोमबत्तियां जलाते आदिवासी ईसाई समुदाय के लोग — फादर बेनेडिक्ट बारला पर हमले के विरोध में एकजुट समुदाय
मंगलवार रात स्कूल परिसर में हुए जानलेवा हमले के बाद बुधवार को खूंटी में सैकड़ों आदिवासी और ईसाई समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए और हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर साढ़े छह घंटे तक शहर जाम रखा।

रात के नौ बजे थे। झारखंड के खूंटी कस्बे के आरसी बॉयज मिडिल स्कूल का परिसर शांत था, और फादर बेनेडिक्ट बारला — जैसे हर रात करते थे — स्कूल की परिक्रमा पर निकले थे। उन्हें क्या पता था कि अंधेरे में तीन चेहरे उनका इंतज़ार कर रहे हैं।

अगले कुछ मिनटों में हुई मारपीट उन्हें मौत के मुंह तक पहुंचा देगी, और जब सुबह उन्हें खून से लथपथ पाया गया, तो पूरा खूंटी हिल जाएगा।

यह घटना मंगलवार रात (20 अक्टूबर) की है, लेकिन इसका पता बुधवार (21 अक्टूबर) की सुबह करीब 8:30 बजे चला। आरसी चर्च के फादर निकोलस के अनुसार, सुबह स्कूल पहुंची एक महिला ने फादर बेनेडिक्ट बारला को घायल और खून से लथपथ पड़ा देखा — वह तुरंत पैरिश हाउस दौड़ी और दूसरों को घटना की जानकारी दी। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें खूंटी सदर अस्पताल से रांची के पल्स अस्पताल रेफर किया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

खबर फैलते ही क्रिश्चन समाज, आदिवासी-मूलवासी समन्वय समिति और विभिन्न सामाजिक संगठनों में भारी नाराजगी छा गई। पश्चिम बंगाल में बाइबल सम्मेलन पर हमले जैसी घटनाओं के बाद यह दूसरा झटका था जिसने भारत के ईसाई समुदाय को झकझोर दिया है।

झारखंड खूंटी फादर बेनेडिक्ट बारला हमला: मंगलवार रात क्या हुआ

सीसीटीवी फुटेज से जो तस्वीर उभरी है, वह डरावनी है। एसपी ऋषभ गर्ग के अनुसार, फुटेज दिखाता है कि हमला मंगलवार रात करीब 9 बजे हुआ था — वही समय जब फादर बेनेडिक्ट परिसर का नियमित मुआयना करने निकले थे। आशंका है कि दो से तीन अपराधी वहां पहले से घात लगाए बैठे थे।

पुलिस को संदेह है कि जब फादर ने विरोध किया तो उन पर हमला कर दिया गया, जिससे वे बेहोश हो गए — और हमलावर उन्हें मृत समझकर भाग गए। सीसीटीवी में तीन संदिग्ध युवक दिखाई दे रहे हैं, जिनकी पहचान करने के प्रयास जारी हैं।

घटनास्थल से मिले सुराग भी चौंकाने वाले हैं। स्कूल कार्यालय में सामान बिखरा पड़ा था, गलियारे में खून के धब्बे मिटाने की कोशिश के निशान मिले हैं, और फादर के मोबाइल फोन को भी जांच के लिए बरामद किया गया है। डॉक्टरों ने बताया कि उनके बाएं कान के नीचे गोलाकार घाव था — लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि चोट गोली से लगी या किसी अन्य वस्तु से।

«पुलिस को संदेह है कि दो या तीन लोग घात लगाकर बैठे थे और जब फादर ने विरोध किया तो उन पर हमला कर दिया, जिससे वे बेहोश हो गए और फिर उन्हें मृत समझकर भाग गए।» — जांच से जुड़े पुलिस अधिकारी (आईएएनएस/भास्कर हिंदी)

फादर बेनेडिक्ट बारला कौन हैं: खूंटी के सम्मानित पादरी और प्रिंसिपल

फादर बेनेडिक्ट बारला सिर्फ एक नाम नहीं — खूंटी के ईसाई समुदाय का एक सम्मानित चेहरा हैं। वे आरसी संत मिखाइल मिडिल स्कूल के प्रिंसिपल हैं और खूंटी के संत मिखाइल महागिरजाघर के फादर (पुजारी) भी हैं। आसपास के इलाकों में सामाजिक कार्यों को लेकर उनकी अलग पहचान है।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, खूंटी के ईसाई समुदाय में उनका काफी सम्मानित व्यक्तित्व है — इसीलिए हमले की खबर ने सिर्फ एक परिवार नहीं, पूरे समाज को सड़कों पर उतार दिया।

यह पहली बार नहीं है जब एक ईसाई धार्मिक नेता पर इस तरह का हमला हुआ है। छत्तीसगढ़ के कोरबा में पास्टर पीतांबर सिंह की हिरासत और भारत में मसीही सताव 2026 की खबरें बताती हैं कि देश भर में ईसाई धार्मिक नेतृत्व बढ़ते दबाव में है — चाहे हमला झूठे आरोपों के रूप में आए या अंधेरी रात के घात के रूप में।

खूंटी बंद: साढ़े छह घंटे जाम, समुदाय ने मांगी तत्काल गिरफ्तारी

बुधवार सुबह खबर फैलते ही आदिवासी और ईसाई समुदायों के सैकड़ों सदस्य सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने सुबह करीब 10:30 बजे से खूंटी कस्बे के मुख्य भगत सिंह चौक को जाम कर दिया और हमले के लिए जिम्मेदार लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए विरोध मार्च भी निकाला। शाम 4:30 बजे तक रांची-खूंटी-चैबासा सड़क पर जाम जारी था — कुल साढ़े छह घंटे तक शहर में आवागमन पूरी तरह ठप रहा।

प्रदर्शनकारियों ने हमले में शामिल लोगों की गिरफ्तारी और घटना के आसपास की परिस्थितियों को उजागर करने की मांग की, और चेतावनी दी कि आरोपियों की गिरफ्तारी तक आंदोलन जारी रहेगा।

खूंटी के पुलिस अधीक्षक ऋषभ गर्ग और एएसपी क्रिस्टोफर केरकेट्टा मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। बाद में उपायुक्त मोहम्मद जावेद हुसैन और एसपी के कड़ी कार्रवाई के आश्वासन के बाद ही जाम समाप्त हो सका। पुलिस उस अज्ञात महिला की भी तलाश कर रही है जिसने सबसे पहले पादरी को घायल अवस्था में पाया था — उसका बयान जांच के लिए अहम हो सकता है।

जांच जारी: हमले का मकसद अभी स्पष्ट नहीं — आधिकारिक पुष्टि का इंतज़ार

पुलिस सीसीटीवी फुटेज, घटनास्थल से बरामद सबूतों और अन्य परिस्थितियों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। लेकिन दो बड़े सवालों के जवाब अभी बाकी हैं: हमलावर कौन थे, और हमले के पीछे का मकसद क्या था — लूट, निजी दुश्मनी, या कुछ और? आधिकारिक पुष्टि का इंतज़ार है, और पुलिस ने अभी तक किसी धार्मिक या सांप्रदायिक कोण की पुष्टि नहीं की है।

यह सावधानी अहम है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, इस हमले को किसी निश्चित खांचे में नहीं डाला जा सकता। लेकिन एक बात तय है — एक स्कूल प्रिंसिपल और पादरी पर रात के अंधेरे में हुआ यह बर्बर हमला पूरे खूंटी को हिलाकर रख गया है।

दबाव के बीच भारत में बढ़ती कलीसिया की कहानियां बताती हैं कि संकट के बावजूद विश्वास डगमगाता नहीं — और खूंटी की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब इस बात का सबूत है कि समुदाय अपने नेताओं के साथ खड़ा है। सवाल अब यह है: सीसीटीवी के वो तीन चेहरे कौन थे, और किस मकसद से एक शांतिप्रिय पादरी को मौत के घाट उतारने की कोशिश की गई? पुलिस की जांच का जवाब आना बाकी है — और खूंटी की आंखें उसी जवाब पर टिकी हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फादर बेनेडिक्ट बारला पर हमला कब और कहां हुआ?

सीसीटीवी फुटेज के अनुसार हमला मंगलवार 20 अक्टूबर 2026 की रात करीब 9 बजे हुआ था, जब फादर बेनेडिक्ट बारला खूंटी (झारखंड) के आरसी बॉयज मिडिल स्कूल परिसर का नियमित निरीक्षण करने निकले थे। इसका पता बुधवार 21 अक्टूबर की सुबह करीब 8:30 बजे चला, जब एक महिला ने उन्हें खून से लथपथ पड़ा देखा।

फादर बेनेडिक्ट बारला कौन हैं?

फादर बेनेडिक्ट बारला झारखंड के खूंटी में आरसी संत मिखाइल मिडिल स्कूल के प्रिंसिपल और संत मिखाइल महागिरजाघर के पादरी हैं। खूंटी के ईसाई समुदाय में उनका काफी सम्मानित व्यक्तित्व है और सामाजिक कार्यों को लेकर उनकी अलग पहचान है।

फादर बेनेडिक्ट बारला की हालत कैसी है?

प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें खूंटी सदर अस्पताल से रांची के पल्स अस्पताल रेफर किया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों ने उनके बाएं कान के नीचे गोलाकार घाव बताया है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि चोट गोली से लगी या किसी अन्य वस्तु से — इसकी आधिकारिक पुष्टि का इंतज़ार है।

हमले के विरोध में क्या हुआ?

21 अक्टूबर को आदिवासी और ईसाई समुदायों के सैकड़ों सदस्यों ने खूंटी में भगत सिंह चौक जाम कर दिया और विरोध मार्च निकाला। सुबह 10:30 से शाम 4:30 तक करीब साढ़े छह घंटे तक रांची-खूंटी-चैबासा सड़क बन्द रही। प्रदर्शनकारियों ने हमलावरों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की और चेतावनी दी कि गिरफ्तारी तक आंदोलन जारी रहेगा।

हमले के पीछे का मकसद क्या था?

पुलिस ने अभी तक हमले के मकसद और हमलावरों की पहचान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सीसीटीवी में तीन संदिग्ध युवक दिखे हैं, फादर का मोबाइल फोन जांच के लिए बरामद किया गया है, और पुलिस हर कोण से जांच कर रही है। आधिकारिक पुष्टि का इंतज़ार है।

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