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📰 FaithStories News Desk · Article #162 · Published: 23 Oct 2026, 05:26 AM PKT

आज: मंगलुरु में 2000 हिंदू-मुस्लिमों ने मिलकर बनाया चर्च — धार्मिक एकता की मिसाल

मंगलुरु के परमुडे में नवनिर्मित संत योहन बैपटिस्ट चर्च के उद्घाटन में सब्जियों और चावल की टोकरियां लेकर जाते हिंदू-मुस्लिम-ईसाई ग्रामीण
परमुडे, मंगलुरु में संत योहन बैपटिस्ट चर्च के उद्घाटन में भेंट जुलूस — हिंदू और मुसलमान पड़ोसियों ने सब्जियां, चावल और बर्तन चढ़ाए, जिनसे उद्घाटन के दिन का त्योहार-भोजन बना।

अक्टूबर की शुरुआत की एक शाम — कर्नाटक के मंगलुरु के बाहरी इलाके परमुडे में कातील स्थित दुर्गापरमेश्वरी मंदिर के पुजारी ने नया-नवेला चर्च देखा और बस इतना कहा: "कितना शांतिपूर्ण महौल है।" कुछ ही दिनों बाद, 15 अक्टूबर 2026 को उसी चर्च के उद्घाटन में करीब 2000 हिंदू और मुसलमान शामिल हुए — और उन्होंने ईसाइयों के साथ बैठकर धन्यवाद-भोजन भी साझा किया (मैटर्स इंडिया)।

यह कोई साधारण उद्घाटन नहीं था। संत योहन बैपटिस्ट चर्च, परमुडे ने अपनी हीरक जयंती मनाई — यानी 60 साल पूरे होने का जश्न। दोपहर 3 बजे मैंगलोर के बिशप एमेरिटस डॉ. एलॉयसियस पॉल डिसूजा ने नवनिर्मित चर्च का उद्घाटन किया, मैंगलोर के बिशप डॉ. पीटर पॉल सालदाना ने आशीर्वाद समारोह और पवित्र मिस्सा का आयोजन किया, और मैसूर के बिशप डॉ. फ्रांसिस सेराओ ने धर्मोपदेश दिया (दाईजीवर्ल्ड)।

यह पुरानी इमारत करीब 65 साल पुरानी थी — जर्जर हो चुकी थी — और पैरिश की स्थापना 15 अक्टूबर 1965 को हुई थी। ठीक 60 साल बाद उसी तारीख पर चर्च नए रूप में लौटा।

परमुडे चर्च निर्माण: हिंदू-मुस्लिमों ने दिया श्रमदान और चंदा

पर असली खबर चर्च की दीवारों में नहीं, उन लोगों में है जो वहां थे। मैटर्स इंडिया के मुताबिक, चर्च के निर्माण में पड़ोसी हिंदुओं ने न सिर्फ निर्माण-कोष में चंदा दिया, बल्कि 'श्रमदान' — यानी स्वैच्छिक श्रम — के जरिए अपने ईसाई दोस्तों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर काम भी किया।

उद्घाटन से दो दिन पहले भेंट जुलूस निकाला गया, जिसमें सैकड़ों हिंदुओं और मुसलमानों ने सब्जियां, चावल और बर्तन चढ़ाए — उसी सामान से उद्घाटन के दिन त्योहार का भोजन बना। चर्च के पादरी फादर रोनाल्ड पिंटो कहते हैं, "हमने अपने इतिहास की शुरुआत से ही सभी प्रमुख चर्च पर्वों में अंतर-धार्मिक भागीदारी की इस परंपरा को कायम रखा है।"

उद्घाटन से पहले चर्च के सदस्यों ने धर्म या संस्कृति की परवाह किए बिना हर पड़ोसी के घर जाकर न्योता दिया। और वे आए भी — 18 अक्टूबर को धन्यवाद-मिस्सा के बाद पादरी ने बताया कि निमंत्रण व्यक्तिगत रूप से, दरवाजे पर जाकर दिया गया था।

"यह एक अद्भुत क्षण था — बहु-धार्मिक समुदाय के बीच में एक ईसाई होने का।" — विक्टर टौरो, पैरिश सदस्य (मैटर्स इंडिया)

विक्टर टौरो ने बताया कि नए चर्च के हर पत्थर के पीछे "सहयोग और पारस्परिक समर्थन की कहानी" है। उन्होंने कहा कि पड़ोसियों — ज्यादातर हिंदुओं — ने सिर्फ पैसा ही नहीं दिया, बल्कि अपने हाथों से निर्माण में हिस्सा लिया।

मंदिर के पुजारी ने चर्च आकर क्या कहा?

इस कहानी का सबसे कोमल पल शायद उद्घाटन से कुछ दिन पहले आया। परमुडे चर्च, कातील के प्रसिद्ध हिंदू तीर्थस्थल दुर्गापरमेश्वरी मंदिर के रास्ते पर स्थित है — और उस मंदिर के पुजारी ने अक्टूबर की शुरुआत में नव-निर्मित चर्च का दौरा किया।

पुजारी ने चर्च के शांतिपूर्ण वातावरण और सौहार्द की सराहना की। सोचिए — एक मंदिर के पुजारी का एक चर्च में आना, उसकी शांति को महसूस करना, और उसकी तारीफ करना। ऐसे क्षणों से ही असली भारत बनता है — जो खबरों की सुर्खियों से बहुत बड़ा है।

हीरक जयंती समारोह: 60 साल, तीन बिशप और पूरा गांव

उद्घाटन के बाद बिशप डॉ. पीटर पॉल सालदाना की अध्यक्षता में हीरक जयंती की जनसभा हुई। मुख्य अतिथियों में सांसद कैप्टन बृजेश चौटा, मंत्री यू. टी. खादर, विधायक उमानाथ कोटियान और एमएलसी इवान डिसूजा शामिल हुए (दाईजीवर्ल्ड)।

विधायक उमानाथ कोटियान ने कहा, "आज परमुडे इलाके के लोग एक ही मां के बच्चों की तरह सद्भाव में रहते हैं।" उन्होंने कहा कि पूजा-स्थल लोगों को जोड़ते हैं और सामूहिक प्रार्थना का अवसर देते हैं — खुशियां, दुख, कठिनाइयां और सुख एक-दूसरे के साथ बांटने से लोगों को ताकत मिलती है।

"आज परमुडे इलाके के लोग एक ही मां के बच्चों की तरह सद्भाव में रहते हैं।" — उमानाथ कोटियान, विधायक (दाईजीवर्ल्ड)

समारोह की तैयारी भी उत्सव थी। 11 अक्टूबर को परमुडे बाजार से चर्च तक 'होरे कनिके' — यानी भेंट — जुलूस निकला, और जयंती सभा के बाद देवादास कापिकाड की मंडली ने तुलु हास्य नाटक 'सुन्नदा बोट्टु' का मंचन किया। जनता के लिए सामूहिक भोज भी रखा गया।

मैसूर के बिशप डॉ. फ्रांसिस सेराओ ने अपने धर्मोपदेश में कहा, "चर्च लोगों को सामूहिक पूजा के लिए एकजुट करने और एकजुटता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।" उन्होंने पैरिश की एकता और कड़ी मेहनत की सराहना की, जिसने कम समय में उनका सपना साकार कर दिया (दाईजीवर्ल्ड)।

भारत में धार्मिक एकता: परमुडे से मिलती उम्मीद

ऐसे समय में यह कहानी और भी कीमती हो जाती है, जब देश के कई हिस्सों से सताव की खबरें आती हैं — झारखंड के खूंटी में फादर बेनेडिक्ट बारला पर हाल ही में जानलेवा हमला हुआ, पश्चिम बंगाल में बाइबल सम्मेलन पर हमला हुआ, और राजस्थान में धर्मांतरण के झूठे आरोप में 13 ईसाई महीनों तक जेल में रहे। परमुडे ने दिखाया कि दूसरा रास्ता भी मौजूद है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी तमिलनाडु में चर्च शिखर की तोड़फोड़ पर रोक लगाकर संदेश दिया था कि कानून सबके साथ है। परमुडे की कहानी उस संदेश को जमीनी हकीकत में बदलती है — जहां शिखर की रक्षा अदालत ने की, वहीं दिलों को जोड़ा पड़ोसियों ने।

परमुडे का सबक सरल है और गहरा भी: एकता भाषणों से नहीं, टोकरियों से बनती है — सब्जियों की टोकरी, चावल की टोकरी, श्रमदान की टोकरी। जब 2000 पड़ोसी मिलकर एक चर्च बनाते हैं, तो वे सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं जोड़ते — वे भरोसा जोड़ते हैं।

सवाल अब यह है: क्या भारत के दूसरे गांवों और शहरों में भी परमुडे जैसा भरोसा बन पाएगा? और अगर हां, तो वह रास्ता किसके दरवाजे से शुरू होगा — चर्च के, मंदिर के, या मस्जिद के? जवाब शायद परमुडे के उस भेंट जुलूस में छिपा है, जहां तीनों धर्मों के लोग एक ही दिशा में चल रहे थे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंगलुरु के परमुडे चर्च में क्या हुआ?

15 अक्टूबर 2026 को संत योहन बैपटिस्ट चर्च, परमुडे का नवनिर्मित रूप उद्घाटन और हीरक जयंती (60 साल) समारोह मनाया गया। उद्घाटन में करीब 2000 हिंदू और मुसलमान पड़ोसी शामिल हुए और धन्यवाद-भोजन साझा किया (मैटर्स इंडिया, दाईजीवर्ल्ड)।

परमुडे चर्च कितना पुराना है?

पैरिश की स्थापना 15 अक्टूबर 1965 को हुई थी। पुरानी इमारत करीब 65 साल पुरानी और जर्जर हो चुकी थी, इसलिए उसे नए सिरे से बनाया गया (दाईजीवर्ल्ड)।

हिंदू और मुसलमानों ने चर्च निर्माण में कैसे मदद की?

पड़ोसियों ने निर्माण-कोष में चंदा दिया और 'श्रमदान' (स्वैच्छिक श्रम) के जरिए निर्माण में हिस्सा लिया। भेंट जुलूस में चढ़ाई गई सब्जियों और चावल से उद्घाटन का त्योहार-भोजन बना (मैटर्स इंडिया)।

उद्घाटन समारोह में कौन-कौन शामिल हुआ?

बिशप एमेरिटस डॉ. एलॉयसियस पॉल डिसूजा ने उद्घाटन किया, बिशप डॉ. पीटर पॉल सालदाना ने आशीर्वाद और मिस्सा की, मैसूर के बिशप डॉ. फ्रांसिस सेराओ ने धर्मोपदेश दिया। सांसद, मंत्री और विधायक मुख्य अतिथि थे (दाईजीवर्ल्ड)।

मंदिर के पुजारी ने चर्च के बारे में क्या कहा?

अक्टूबर की शुरुआत में कातील स्थित दुर्गापरमेश्वरी मंदिर के पुजारी ने नव-निर्मित चर्च का दौरा किया और वहां के शांतिपूर्ण वातावरण और सौहार्द की सराहना की। चर्च उसी मंदिर के रास्ते पर स्थित है (मैटर्स इंडिया)।

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